पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को एक बार फिर कटघरे में खड़ा किया है। सिद्धू ने इस बार कैप्टन पर तंज मारने के लिए पंजाबी गायक गिप्पी ग्रेवाल के एक गीत ‘वख्त पा दियांगे जालम सरकारा नूं’ पर वीडियो बनाकर जारी किया है।
वीडियो में सिद्धू अपने घर की सीढ़ियों से उत्तर रहे है। हाथ में घड़ी पहनने के दौरान पीछे से गाने की आवाज आती है जिसके बोल हैं, ‘जख्मी होकर जे होवे शेर सुता, कदे उसनु डरा समझिये न। जेहड़े कौम दे लई शहीद हुंदे, उणानु मरया समझिये न।’
इस दौरान सिद्धू अपने घर में स्थापित मंदिर में माथा टेकते हैं। इस गाने के साथ सिद्धू अपने घर के बाहर पार्क में गुस्से से टहलते दिख रहे हैं। उनके पीछे एक सुरक्षा कर्मचारी भी है। सिद्धू ने अपने मंत्री पद के कार्यकाल के दौरान की कई वीडियो क्लिपिंग भी इस वीडियो से जोड़े हुए हैं।
सिद्धू वीडियो में यह कहते हैं कि जब भी कोई योद्धा सच की लड़ाई में पहला कदम रखता है, तब वह सारे रिश्ते नाते पीछे रखकर आता है। सभी बंधन काट कर सच के रास्ते अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए काम करता है। उनका लक्ष्य है जित्तेगा पंजाब। सिद्धू ने कैप्टन का नाम लिए बिना कहा कि किसी को कुछ कहा जा रहा किसी को कुछ। पंजाब मुद्दों से ऊंचा उठेगा। अन्नदाता को भिखारी बना कर रख दिया है, वर्तमान सरकार ने। सच्चाई सर चढ़ का न बोली तो लोग भ्रमित हो जाएंगे।
सिद्धू ने कहा कि वह साल की 20 करोड़ की कमाई छोड़ कर राजनीति में आए हैं। वह अपना एजेंडा देंगे। नीवं का पत्थर बनने के लिए तैयार हैं लेकिन पंजाब को सही रास्ते में ले जाने के लिए प्रयास तो शुरू किए जाएं। पंजाब के लोगों ने सत्ताधारियों को जो ताकत दी थ। वह चार-पांच लोगों के हाथों में सिमट कर रह गई है।
मुझे भाजपा से कोई समस्या नहीं : डॉ. सिद्धू
दो दिन पहले डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने एक ट्वीट कर पंजाब की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। डॉॅ. नवजोत कौर ने कहा कि उन्हें भाजपा के साथ कोई भी समस्या नहीं है। अकाली दल ने पंजाब में जो लूट मचाई थी,उस कारण भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। 2017 का विधान सभा चुनाव भाजपा अकेली लड़ती तो शायद जीत जाते।
डॉॅ. सिद्धू के भाजपा केप्रति नरम तेवरों से कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है। सिद्धू के इस्तीफा देने के बाद डॉ. सिद्धू ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट में कांग्रेस का नाम हटा कर समाजसेवक लिख दिया था। जब सिद्धू भाजपा छोड़ने का निर्णय कर रहे थे, उस समय डॉ. सिद्धू ने भाजपा को कई बार कटघरे में खड़ा किया था। सिद्धू के कांग्रेस में शामिल होने से पहले डॉ. सिद्धू ने उसकी इबारत इसी तरह के बयानों से लिखनी शुरू कर दी थी।