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सेना की भर्ती रैली में 12 हजार में से 1200 नौजवान ही पास कर पाए टेस्ट

Wed, 18 Nov 2015 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
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पंजाब व जम्मू-कश्मीर के उप महानिदेशक (भर्ती) ब्रिगेडियर जेएस साम्याल कहना है कि बदलती जीवनशैली ने पंजाब के नौजवानों की शारीरिक क्षमता को प्रभावित किया है।
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इससे पंजाबी गबरू शारीरिक दक्षता की बाधा को पार करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।  गुरु नानक स्टेडियम में चल रही भर्ती रैली में अब तक 12 हजार युवाओं में से सिर्फ 1200 ही शारीरिक और चिकित्सीय टेस्ट पास कर सके हैं।  

ब्रिगेडियर साम्याल ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में बताया 14 से 21 नवंबर तक आयोजित भर्ती रैली में शहीद भगत सिंह नगर, कपूरथला, होशियारपुर, जालंधर के लगभग 17 हजार युवाओं ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है।
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अब तक 12 हजार प्रतिभागियों में से 1200 ने शारीरिक व चिकित्सीय टेस्ट पास किया है। उन्होंने बताया कि बीती एक अक्तूबर से ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की गई है।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए बायो मैट्रिक सिस्टम शुरू किया गया है। इस मशीन में प्रतिभागी के फिंगर प्रिंट पंच होते ही ऑनलाइन अटेंडेंस हेडक्वार्टर तक पहुंच जाती है और उसका पूरा विवरण तत्काल मिल जाता है।
इससे प्रतिभागी की जगह कोई अन्य प्रतिभागी के भाग लेने की गुंजाइश नहीं रहती है। यह सिस्टम पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के लिए सशक्त औजार बनकर उभरा है।

ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पूरे देश में से पंजाब के 0.5 प्रतिशत युवाओं का रुझान सेना की तरफ बढ़ा है। हालांकि भर्ती में पास होने वाले युवाओं का प्रतिशत घटा है।

भर्ती रैली के इंचार्ज कर्नल संजय सूद ने बताया कि शारीरिक दक्षता टेस्ट पास करने वाले प्रतिभागियों के दस्तावेज जांचने के बाद इनके फिंगर प्रिंट पंच किए जाते हैं।

फिर चिकित्सीय टेस्ट की शुरूआत होती है। उन्होंने बताया कि रैली स्थल पर सात आर्मी डॉक्टर प्रतिभागियों की चिकित्सीय जांच कर रहे हैं। एक प्रतिभागी का फिटनेस टेस्ट तीन डॉक्टरों का पैनल करता है।

संदिग्ध पाए जाने वाले प्रतिभागी का ड्रग टेस्ट भी किया जाता है। मेडिकल फिटनेस टेस्ट पास करने वाले प्रतिभागियों का कॉमन एंट्रेस टेस्ट 29 नवंबर को होगा।

उन्होंने बताया कि मामूली तौर पर मेडिकल में अनफिट होने वाले प्रतिभागियों को फिट होने के लिए स्पेशल चांस दिया जाता है।

इसमें सेना के नियम के अनुरूप दोबारा मेडिकल टेस्ट में पास होने के लिए मामूली कारण को दुरुस्त करने के लिए 42 दिन का समय दिया जाता है। रैली में शामिल प्रतिभागियों में से दस प्रतिशत पंजाबी गबरू शारीरिक दक्षता का दम दिखाने में सफल रहे हैं।
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