दी गई थीं अमानवीय यातनाएं
कैप्टन सौरभ को तोड़ने के मकसद से दुश्मनों ने उन पर कहर बरपाया। उनकी आंखें निकाल ली गईं। कान काट लिए। अलग अलग तरीके से उन्हें प्रताड़ित किया गया। जब दुश्मन इन रणबांकुरों के हौसले को नहीं तोड़ पाए तो कैप्टन कालिया समेत पांच सिपाहियों अर्जुन राम, भीका राम, भंवर लाल बगरिया, मूला राम और नरेश सिंह को मौत के घाट उतार दिया।
नौ जून 1999 को जब पाकिस्तान ने कैप्टन सौरभ कालिया और उनके साथियों के शव भारत को लौटाए तो पूरा देश उबल पड़ा। कैप्टन सौरभ कालिया और उनके साथियों के साथ जो बर्बरता की गई, वह साफ तौर पर जंग के नियमों की धज्जियां उड़ा रही थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की इस नापाक हरकत की निंदा हुई। भारतीय जवानों के शवों पर ये ऐसे घाव थे, जिन्होंने दुनिया को स्तब्ध कर दिया।