दोनों पूर्व जत्थेदारों को अकाल तख्त पर तलब किया जाए: ज्ञानी गौहर
तख्त श्री पटना साहिब के पूर्व जत्थेदार और मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रणजीत सिंह गौहर ए मस्कीन ने ज्ञानी रघबीर सिंह और ज्ञानी हरप्रीत सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब पर बुलाकर स्पष्टीकरण लेने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में अकाल तख्त सचिवालय के इंचार्ज को मांग पत्र सौंपा है।
ज्ञानी गौहर ने कहा कि दोनों पूर्व जत्थेदारों की ओर से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर लगाए जा रहे आरोपों से पंथ में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उनके अनुसार, जब दोनों पद पर थे तब उन्हें प्रबंधन में कोई खामी नजर नहीं आई, लेकिन अब वे संस्था के ढांचे पर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सिखों की सर्वोच्च प्रबंधकीय संस्था है और उसके अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक बयान देना शोभनीय नहीं है। ज्ञानी गौहर ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान पंथ को विभाजित करते हैं। उन्होंने मांग की कि दोनों को अकाल तख्त पर बुलाकर उनके आरोपों पर जवाब लिया जाए और तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय किया जाए, ताकि पंथ में स्पष्टता बनी रहे और संस्थाओं की गरिमा सुरक्षित रह सके।
पंथ आपका परिवार संभाले और आप विरोधियों की सेवा करें?
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मांग की कि ज्ञानी रघबीर सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब कर उनसे जवाब लिया जाए। सरना ने कहा कि पंथ आपके परिवार का ख्याल रखे और आप विरोधी पंथ की सेवा करें, यह स्वीकार्य नहीं है।
सरना ने कहा कि शिरोमणि कमेटी में पाठी के रूप में सेवा शुरू करने के बाद संगठन ने उन्हें पंथ में मान-सम्मान दिया और कई अहम जिम्मेदारियां सौंपीं। इसके बावजूद वे अपनी भूमिकाओं को पूरी तरह नहीं निभा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण पंथक मामलों पर निर्णय लेने के बजाय संगठन को कमजोर करने की कोशिश की गई।
सरना ने यह भी आरोप लगाया कि एसजीपीसी पर गंभीर आरोप लगाने के बाद ज्ञानी रघबीर सिंह दिल्ली पहुंच गए और विरोधी खेमे के संपर्क में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि वे दिल्ली में किन लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और किन बैठकों में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि यदि आरोप लगाए गए हैं तो उनके समर्थन में सबूत भी पेश किए जाएं। पंथ में भ्रम की स्थिति पैदा करना उचित नहीं है। सरना ने दोहराया कि मामले की निष्पक्ष सुनवाई अकाल तख्त पर होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।