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एसजीपीसी ने पंज प्यारों में से चार को किया बर्खास्त

Sat, 02 Jan 2016 02:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
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एसजीपीसी को पांच सिंह साहिबान को पद से हटाने का गुरमता (निर्देश) जारी करने वाले पांच में से चार प्यारों को बर्खास्त कर दिया गया है।
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यह फैसला शुक्रवार को एसजीपीसी की अंतरिम समिति की कार्यकारिणी की बैठक के दौरान लिया गया। पांचवें प्यारे 31 दिसंबर को रिटायर हो चुके हैं। पांच तख्तों के जत्थेदारों द्वारा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को दी माफी से अकाल तख्त साहिब के पंज प्यारे नाराज चल रहे थे। इसके बाद उन्होंने एसजीपीसी को जत्थेदारों को उनके पद से हटाने का निर्देश दिया था।

एसजीपीसी की ओर से कोई कार्रवाई न किए जाने के कारण पंज प्यारों ने दोबारा आदेश जारी किए थे कि अगर एक जनवरी तक एसजीपीसी पांचों जत्थेदारों को उनके पद से नहीं हटाती तो वह दो जनवरी को कौम के नाम नया आदेश जारी कर देंगे। इससे पहले ही एक जनवरी को एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके चार प्यारों सतनाम सिंह, भाई मंगल सिंह, भाई त्रिलोक सिंह और सतनाम सिंह को बर्खास्त कर दिया गया जबकि पांचवें प्यारे मेजर सिंह वीरवार यानी 31 दिसंबर को ही रिटायर हुए थे।
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मनमर्जी कर रहे थे प्यारे
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मक्कड़ ने कहा कि पंज प्यारे ड्यूटी सही ढंग से नहीं कर रहे थे। उनका काम धर्म का प्रचार और अमृतपान करवाना है। ये सभी एसजीपीसी के कर्मचारी हैं और उनके ऊपर भी सर्विस नियम लागू होते हैं लेकिन उन्होंने मनमर्जी की। मक्कड़ ने कहा कि पंज प्यारों ने कुछ समय से अपने कार्य क्षेत्र से बाहर जाकर काम किए हैं। ऐसा करके उन्होंने सिख कौम के अंदर अनियमिताएं पैदा की हैं।

पहली बार पंज प्यारों ने श्री अकाल तख्त साहिब के खिलाफ निर्देश दिए हैं। यह साजिश का हिस्सा है। पंज प्यारों ने महान संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। अकाल तख्त साहिब और अन्य तख्त साहिबों के जत्थेदारों के खिलाफ गुरमता देने का अधिकार पंज प्यारों को नहीं है। इसलिए इन प्यारों के खिलाफ कार्रवाई करनी जरूरी थी।
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साजिश के तहत हमें हटाया गया- भाई खंडा
पंज प्यारों में से एक भाई सतनाम सिंह खंडा ने कहा कि एसजीपीसी ने चाहे उन्हें पद से हटा दिया है लेकिन वे अपने फैसले पर अडिग हैं। वे दो जनवरी को हर हाल में आदेश जारी करेंगे। उन्होंने कहा कि पूरी कौम जानती है कि एसजीपीसी क्या कर रही है। एसजीपीसी जत्थेदारों के माध्यम से अपने फैसले जारी करवाती है। कमेटी ने एक साजिश के तहत उन्हें पदों से हटाया है लेकिन वे हार नहीं मानेंगे।
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