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'शताब्दी वर्ष पर एसजीपीसी का धार्मिक व अन्य विवादों में उलझना दुर्भाग्यपूर्ण'

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एसजीपीसी के पूर्व अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा गठित की गई एसोसिएशन के सैकड़ों सदस्यों ने इस बात पर चिंता जताई है कि कुछ समय से एसजीपीसी कई धार्मिक व अन्य विवादों में उलझ रही है, यह चिंता का विषय है। एसजीपीसी इस वर्ष अपनी स्थापना का शताब्दी पर्व मना रही है। एसजीपीसी सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है, ऐसे में इसका विवादों में उलझना दुर्भाग्यपूर्ण है। एसजीपीसी के सभी विवादों के हल के लिए एसजीपीसी को प्रयास करने चाहिए। संस्था के पूर्व अधिकारी व कर्मचारी इन विवादों के हल के लिए अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं।
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एसोसिएशन के मीडिया सचिव बाबा दलजीत सिंह बेदी ने बताया कि मंगलवार को बैठक में सेवामुक्त हुए कर्मचारियों व अधिकारियों के टेलीफोन नंबरों व घर के पते की एक डायरेक्ट्री रिलीज की गई है। इसमें सेवा मुक्त एसजीपीसी के 250 से अधिक अधिकारियों के नाम हैं। इस डायरेक्ट्री में एसजीपीसी, श्री दरबार साहिब, धर्म प्रचार कमेटी, श्री गुरु रामदास अस्पताल व सूचना केंद्र कार्यालय के भी नंबर है। एसोसिएशन के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह अदलीवाल की अगुवाई में हुई बैठक में कुछ प्रस्ताव भी पारित किेये गए।
इस मौके पर पाकिस्तान सरकार द्वारा कोयटा में स्थित 200 वर्ष पुराने गुरुद्वारा सिंह सभा को संगत के लिए खोलने का स्वागत किया गया। लाहौर के नौलखा बाजार में स्थित एतिहासिक गुरुद्वारा साहिब भाई तारु सिंह की जमीन पर कब्जा करने व गुरुद्वारा साहिबान को मस्जिद में तब्दील करने की साजिश की निंदा की गई। बैठक में एसजीपीसी के पूर्व अधिकारियों व कर्मचारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह पाकिस्तान सरकार से बातचीत कर मामले का हल करवाए। इस बैठक में बलबीर सिंह, राज सिंह, परविंदर सिंह, हरिंदर पाल सिंह व सतबीर सिंह मौजूद थे।
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