अमृतसर के गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से लापता हुए 267 पावन स्वरूपों की जांच के लिए नियुक्त की गई पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व जज नविता सिंह ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया है। जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बताया कि पूर्व जज नविता सिंह ने घरेलू मजबूरी के कारण जांच करने में अपनी असमर्थता जताई है। उन्होंने इस संबंध में श्री अकाल तख्त को एक पत्र लिखकर जानकारी दी है। अब जत्थेदार ने जांच में सहायक वकील ईशर सिंह को ही मुख्य जांच अधिकारी बना दिया है। ईशर सिंह के साथ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सीनियर वकील डॉ. हरप्रीत कौर और चार्टर्ड अकाउंटेंट बीबी हरलीन कौर को सहायक नियुक्त किया गया है।
जत्थेदार ने दावा किया कि नविता सिंह के जांच से अलग होने के बावजूद जांच में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जांच निष्पक्ष होगी और इसकी रिपोर्ट एक महीने में श्री अकाल तख्त साहिब को मिल जाएगी।
पिछले एक सप्ताह से इस मामले की जांच के लिए नविता सिंह के सहायक के रूप में नियुक्त सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील ईशर सिंह तेलगांना श्री अकाल तख्त के सचिवालय में बैठ कर रिकॉर्ड को खंगाल रहे हैं। इस मामले के चश्मदीद गोल्डन प्रिंटिंग प्रेस के पूर्व सुपरवाइजर कमलजीत सिंह सिंह कई अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है। नविता सिंह ने इस संवेदनशील मामले की जांच में एक बार भी रुचि नहीं दिखाई है। पहले यह चर्चा थी कि ईशर सिंह द्वारा प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद नविता सिंह इसमें शामिल होंगी लेकिन वह अमृतसर नहीं पहुंची।
सूत्रों के अनुसार पावन स्वरूपों की जांच कर रहे ईशर सिंह ने वीरवार भी गोल्डन प्रेस के कई कर्मचारियों से पूछताछ की। जानकारी के अनुसार जांच के दौरान कर्मचारियों से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप किसी गुरुद्वारा साहिब में सुशोभित करने से पहले की प्रक्रिया पर चर्चा की। जांच कमेटी ने पिछले चार साल के रिकॉर्ड को भी खंगाला है।