सुल्तानपुर लोधी में बोट से काली बेईं के दर्शन करते हुए विदेशों से आए लोग।
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सिख धर्म में छिपे सरबत के भले का फलसफा अब विदेशी भी समझने लगे हैं। प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देव के चरण स्पर्श पवित्र काली बेईं में डुबकी लगाने आठ देशों के 25 प्रतिनिधि रविवार को पहुंचे। इन सभी ने सिख धर्म को धारण कर रखा है और बाबा नानक की पवित्र काली बेईं के अलावा देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के लिए भारत आए हुए हैं।
वफद में शामिल विदेशियों ने कहा कि उन्होंने दुनिया के सभी धार्मिक स्थलों का दौरा किया है, लेकिन पवित्र काली बेईं जितना रमणीक और पावन स्थान नहीं देखा। यहां आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति मिली है और गुरबानी के प्रति उनकी आस्था प्रगाढ़ हुई है।
संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पवित्र काली बेईं के 16 साल की कारसेवा से बदले स्वरूप के बारे में प्रतिनिधिमंडल को बताया। विदेशी संगत ने अपने हाथों से किरत की, वहीं अमृत वेले में रसभिन्ने कीर्तन का आनंद उठाया।
इसके बाद गांव सीचेवाल का दौरा कर नर्सरी और देसी तकनीक से निर्मित ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यशैली के बारे में जाना, जिसे नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत सीचेवाल मॉडल के रूप में केंद्र सरकार ने गंगा की सफाई के लिए अपना रखा है।
फ्रांस के सतमुख सिंह और चीन की धर्मजोत कौर की अगुवाई में आए 25 सदस्यीय वफद में आस्ट्रिया, हांगकांग, ताइवान, न्यूजीलैंड, मिस्र और इटली से संबंधित हैं। उन्होंने बताया कि वह सिख धर्म के मूल ज्ञान को जानने के लिए पंजाब के दौरे पर हैं।
वह दिल्ली से चलकर माछीवाड़ा साहिब और लुधियाना से होते हुए गांव सीचेवाल पहुंचे हैं। सुल्तानपुर लोधी में उन्होंने बोट के माध्यम से पवित्र काली बेईं के दर्शन किए।