फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दर्द का एक साल: पठानकोट में 365 दिन बाद भी नहीं भरे बाढ़ के जख्म, कई पीड़ित अब भी मुआवजे के इंतजार में

Thu, 27 Aug 2026 08:18 AM IST
Nivedita सूरज प्रकाश, संवाद, पठानकोट

सार

26 अगस्त 2025 की शाम रंजीत सागर डैम का जलस्तर 527.91 मीटर पहुंच गया था जो खतरे के निशान से ऊपर था। इसके बाद डैम के गेट खोलकर रावी में लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा गया। माधोपुर हेडवर्क्स के फ्लड गेट जाम होने से पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के घरों तक पहुंच गया।
विज्ञापन
पठानकोट में बाढ़ का एक साल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पठानकोट के बॉर्डर एरिया में पिछले साल 26-27 अगस्त की दरमियानी रात आई भीषण बाढ़ को एक साल हो गया है लेकिन प्रभावित लोगों के जख्म आज भी ताजा हैं। 
विज्ञापन


रंजीत सागर डैम से रावी दरिया में अचानक लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद माधोपुर हाइडल चैनल और माधोपुर हेडवर्क्स के फ्लड गेटों की स्थिति बिगड़ गई। पानी घरों खेतों और सड़कों में घुस गया। रावी किनारे बसे एक गुज्जर परिवार के दो बच्चों और एक महिला की पानी में बहने से मौत हो गई।

विज्ञापन


26 अगस्त 2025 की शाम रंजीत सागर डैम का जलस्तर 527.91 मीटर पहुंच गया था जो खतरे के निशान से ऊपर था। इसके बाद डैम के गेट खोलकर रावी में लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा गया। माधोपुर हेडवर्क्स के फ्लड गेट जाम होने से पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के घरों तक पहुंच गया।

जाम गेट खोलने के लिए सिंचाई विभाग के करीब 50 कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान गेट टूटने से एक कर्मचारी पानी में डूब गया। बाकी कर्मचारी भी पानी के बीच फंस गए जिन्हें वायुसेना ने सुरक्षित बाहर निकाला। गेट टूटने के बाद पानी ने रौद्र रूप धारण कर लिया। उस समय पाकिस्तान की तरफ भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने की बात सामने आई थी।
विज्ञापन

लापरवाही की कीमत बेकसूरों ने चुकाई
बाढ़ के दौरान कई परिवारों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। सेना जिला प्रशासन और वायुसेना ने अभियान चलाकर बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला। लोगों का कहना था कि लापरवाही किसी की रही लेकिन इसकी कीमत बेकसूरों को चुकानी पड़ी।

बाढ़ के बाद माधोपुर हाइडल चैनल नहर का पुनर्निर्माण पूरा कर दिया गया है। माधोपुर हेडवर्क्स के फ्लड गेटों को सिंचाई विभाग ने इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जोड़ दिया है ताकि जरूरत पड़ने पर एक बटन से गेट खोले जा सकें। इन्हें मैनुअल तरीके से भी चलाया जा सकता है।

सड़कें और जमीनें आज भी दर्द की वजह
बॉर्डर एरिया के कई हिस्सों में क्षतिग्रस्त सड़कें टूटे मकान और बह चुकी जमीनें आज भी लोगों की परेशानी बनी हुई हैं। कई परिवार मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। अड्डा कोलियां में कच्चा धुसी बांध टूटने से घर खेत और सड़कें पानी की चपेट में आई थीं। स्थानीय कैबिनेट मंत्री लाल चंद ने यहां पक्का बांध बनाने की बात कही थी लेकिन काम अभी पूरा नहीं हुआ।

बमियाल में बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण भी लंबे समय से जारी है। हाल ही में जलालिया दरिया में पानी बढ़ने से निर्माणाधीन पुलिया फिर क्षतिग्रस्त हो गईं जिससे बमियाल का पठानकोट और दीनानगर से संपर्क टूट गया।

फिर बढ़ा पानी तो लौट आया डर
कुछ दिन पहले जलालिया दरिया में पानी बढ़ने से सड़कों और खेतों तक पानी पहुंच गया था। इससे लोगों में फिर डर पैदा हो गया। बाढ़ पीड़ित सुखविंदर सिंह ने बताया कि उनका घर और खेत तबाह हो गए थे। अड्डा कोलियां में उनकी बहन की दुकानें भी बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुईं लेकिन करोड़ों रुपये के नुकसान के बावजूद उन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला।

ग्रामीणों ने स्थायी बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था बनाने क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलियों का निर्माण जल्द पूरा कराने और लंबित मुआवजा देने की मांग की है।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें