पंजाबियों में विदेश जाने का खासा क्रेज रहता है। लेकिन अमेरिका से डिपोर्ट होकर आए पंजाब के 30 लोगों की दर्द भरी कहानियों को सुनकर हर कोई स्तब्ध है। डोंकी रूट के जरिये गए लोगों ने ऐसी यातनाएं झेली, जो उन्हें जिंदगी भर याद रहेंगी।
अमेरिका में डोंकी रूट के जरिये गए अमृतसर दलेर सिंह भी बुधवार को 104 भारतीयों के साथ भारत लौटे हैं। मिन्नी बस चलाने वाले गांव सलेमपुर के दलेर सिंह गांव के नजदीक स्थित गांव कोटली के एजेंट सतनाम सिंह के झांसे में ही फंसकर अमेरिका गया था। उसने अमेरिका जाने के लिए 60 लाख रुपये दिए थे, जबकि उसकी बात 45 लाख रुपये में हुई थी। एजेंट ने उसे ब्राजील में किडनैप करवा दिया और 15 लाख रुपये की मांग परिवार के समक्ष रख दी।
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एजेंट ने उसकी पत्नी चरनजीत कौर को फोन किया कि 15 लाख रुपये और भेजो, तभी उसका पति अमेरिका में जा सकेगा। फिर क्या था पत्नी ने अपने गहने गिरवी रखे और अपने रिश्तेदारों से कर्ज लिया और वह पैसे एजेंट को भिजवाए। पैसे देने के बावजूद दलेर सिंह कई यातनाएं सहकर अमेरिका में पहुंचा था। उसे वहां जाकर उम्मीद थी कि अब उसका बुरा समय टल गया और वह काम करके अपना सारा कर्ज लौटा देगा।
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दलेर सिंह बताया कि मेक्सिको से होते हुए तेजवाना बाॅर्डर पर पहुंचा और वहीं से उसकी अमेरिका में एंट्री हुई। यह 20 दिन उसके सबसे खतरनाक दिनों में से थे। खाना भी बड़ी मुश्किल से मिलता था। कई दिन तक तो बिना खाना खाएं ही पनामा के जंगलों में गुजरना पड़ा। कई बार तो पानी भी नहीं मिलता था।
मंत्री ने दिए एजेंट के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
दलेर सिंह से मिलने गए एनआरआई मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने गांव कोटली के एजेंट सतनाम सिंह के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। मंत्री ने डीएसपी इंद्रजीत सिंह को हिदायत दी कि पीड़ित के बयान कलमबद्ध करें और एजेंट सतनाम सिंह के खिलाफ कार्रवाई करे। उस पर मामला दर्ज करके जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की हिदायत भी की गई है। धालीवाल ने कहा कि पंजाब सरकार एजेंटों के खिलाफ सख्ती करेगी।
डिपोर्ट किए भारतीयों का मुद्दा संसद में उठाएंगे: औजला
अमेरिका से डिपोर्ट किए गए भारतीयों का मुद्दा सांसद गुरजीत सिंह औजला संसद में उठाएंगे। औजला ने कहा कि सरकार उन भारतीयों के रोजगार के लिए प्रयास करे, क्योंकि यहां उन्हें रोजगार नहीं दिया गया तभी वो विदेशों में जाने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारी नाकामयाबी है कि युवा विदेशों में गए। औजला ने कहा कि सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि अन्य देशों में लोग अमेरिका से वापस भेजे जा रहे हैं और यह उनके देश की पाॅलिसी है। इसलिए अमेरिका पर दोष देने की बजाय अपने देश का सामर्थ्य दिखाएं। वह यह नहीं कहते कि इन लोगों को पैसे दिए जाएं, बल्कि इन लोगों को पुर्नवास की कोशिश की जाए।