कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक रणजीत सिंह छज्जलवडी और उनकी पत्नी सतवंत कौर के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के केस में जज एकता सहोता की अदालत ने चार्ज फ्रेम कर दिए है।
छज्जलवडी के खिलाफ जंडियाला गुरु के रहने वाले शहीद दर्शन सिंह के बेटे बलविंदर सिंह ने थाना सिविल लाइन में केस दर्ज करवाया था। बलविंदर सिंह के पिता फौज में थे और उनकी शहीदी के बाद मिली गैस एजेंसी पर छज्जलवडी व उसकी पत्नी ने कब्जा कर रखा था।
मामले की पैरवी कर रहे एडवोकेट अवतार सिंह रंधावा और मंदीप सिंह ने बताया कि बलविंदर सिंह के पिता दर्शन सिंह आर्मी में थे। वर्ष 1987 में श्रीलंका में पवन आपरेशन के दौरान दर्शन सिंह शहीद हो गए। शहीदी के बाद छज्जलवडी और उसकी पत्नी अफसोस जाहिर करने के लिए दर्शन सिंह की पत्नी अमरजीत कौर के पास गए। दिलासा दिया और कहा कि उनके पास जो कोई भी सरकारी दस्तावेज आएं तो वह उन्हें देती रहें। उस समय बलविंदर सिंह केवल एक महीने का था। अमरजीत कौर ने ठीक वैसे ही किया। दो साल के बाद छज्जलवड़ी ने कुछ दस्तावेजों पर साइन करवा लिए और मौके पर ही 20 हजार रुपये दे दिए।
इसके बाद एक वर्ष में 12 हजार रुपये देने की बात कही। ऐसे ही समय बीत गया। 2010 में शहीद दर्शन सिंह का बेटा बलविंदर सिंह समझ रखने लग पड़ा तो उसने पूरे मामले की पड़ताल की। मां-बेटे ने आर्मी के अधिकारी नवराज सिंह ग्रेवाल से मुलाकात की। ग्रेवाल दोनों को उच्चाधिकारियों के पास लेकर गए। इस पर पता चला कि उनके नाम पर मोहाली में गैस एजेंसी अलाट हुई है। गैस एजेंसी छज्जलवड़ी चला रहे हैं।
एडवोकेट रंधाना के मुताबिक इस बात की भनक छज्जलवड़ी को भी लग गई। इस पर छज्जलवड़ी अपनी ताकत का प्रयोग कर मां-बेटे को पुलिस के जरिये बंदी बना लिया। इसी दौरान नया एग्रीमेंट भी जबरदस्ती साइन करवा लिया। मां-बेटे ने छूटने के बाद अमृतसर आकर 2012 में थाना सिविल में शिकायत दी। मामले की जांच होने के बाद 2014 में छज्जलवडी सहित उसकी पत्नी व एग्रीमेंट में गवाही देने वाले विनोद अरोड़ा और दर्शन अरोड़ा के खिलाफ केस दर्ज दिया गया। वर्ष 2014 से केस अदालत में चल रहा है। मामले की सुनाई करते हुए अब अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।