भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने अमृतसर से कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी कैप्टन अमरिंदर सिंह का समर्थन करने का ऐलान किया है।
शुक्रवार को वे अपने समर्थकों के साथ गुरुनगरी पहुंचे थे। इस अवसर पर बेदी ने कहा कि अमृतसर का नेतृत्व करने के लिए कैप्टन सबसे बढ़िया नेता हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह और अपने साथियों अशोक अरोड़ा और आकाश लाल की उपस्थिति में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए बेदी ने कहा कि बतौर पंजाबी वह कैप्टन को इन चुनावों के लिए समर्थन देते हैं। वह यहां परमात्मा को अरदास करने आए हैं कि यह जीतें और अमृतसर को बढ़िया नेतृत्व और प्रतिनिधित्व दें। बेदी ने कहा कि भाजपा उम्मीदवार अरुण जेटली कैप्टन के मुकाबले नहीं हैं। जेटली ने सिर्फ बेडरूम की सियासत की है, जबकि कैप्टन अमरिंदर के पास पांच दशकों का एक बड़ा तजुर्बा है। उनको याद है कि बतौर मुख्यमंत्री इनका कार्यकाल पंजाब के लिए शानदार था।
बेदी के साथी और पारदर्शिता के लिए काम करने वाली एनजीओ बनाने वाले अशोक अरोड़ा ने कहा कि अरुण जेटली का रिकार्ड पूरी तरह से साफ नहीं है। वह दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन का हिस्सा थे, जिसकी कार्यप्रणाली की सीरियस फ्राड इनवेस्टिगेशन सैल जांच कर रहा है। जो व्यक्ति एक छोटे से क्रिकेट क्लब को नहीं चला सकता, वह कैसे इस पवित्र व ऐतिहासिक शहर अमृतसर का नेतृत्व करेगा।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक जेटली का डीडीसीए पर एकाधिकार रहा है और इसका चुनाव वह प्रतिनिधि वोट से जीत रहे थे। परंतु जब हालात उनके खिलाफ होने लगे, तो यह बाहर निकल आए और अपने एक निकटवर्ती व्यक्ति को चुन लिया। उन्होने खुलासा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने जेटली के नेतृत्व में डीडीसीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल किए थे और क्रिकेट से न संबंधित लोगों द्वारा इसको कंट्रोल करने पर भी सवाल किया था। अरोड़ा ने जेटली को पूछा कि वह दिल्ली से क्यों नहीं लड़े।
जेटली के पंजाबी होने के दावों पर उन्होंने कहा कि पश्चिमी दिल्ली एक पंजाबी बहुमत वाला हलका है, क्यों उन्होंने यह हलका नहीं चुना। साफतौर पर जेटली के पास दिल्ली के लोगों का सामना करने के लिए नैतिक हिम्मत नहीं है। कैप्टन ने अरोड़ा के आरोपों को पूरा करते हुए जेटली को 2006 से 2012 के दौरान अपनी जायदाद में हुए 26 करोड़ से 158 करोड़ के बेतहाशा बढ़ोतरी पर स्पष्टीकरण देने को कहा। उन्होंने कहा कि जेटली ने 2009 में कानूनी प्रैक्टिस बंद कर दी थी और उनकी आमदन का एकमात्र जरिया बतौर राज्यसभा में विरोधी पक्ष के नेता का वेतन था। वह इस बारे कई बार जेटली से पूछ चुके हैं, परंतु उन्होंने अभी तक जवाब नहीं दिया।