गुरु नानक देव अस्पताल में कोरोना से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए स्थापित आईसोलेशन वार्ड में दाखिल एक मरीज ने अस्पताल की पांचवीं मंजिल स्थापित में छलांग मार कर खुदखुशी कर ली है। मरीज का नाम सवरन सिंह (40) निवासी भिखीविंड गांव सैदपुर (तरनतारन) है। यह व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव आने के बाद काफी परेशान था। दो दिन पहले है इसे जीएनडीएच के आईसोलाशन वार्ड में दाखिल करवाया गया था। सोमवार को सुबह यह व्यक्ति शौच के बहाने शौचालय में गया। जहां उसने पहले शौचालय की खिड़की का शीशा तोड़ा। फिर खिड़की से कूद गया। पांचवीं मंजिल से छलांग लगाने के बाद वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। वहां तैनात अस्पताल के कर्मचारी उसे इमरजेंसी वार्ड में ले गए। जहां उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन ने शव मोर्चरी में रखवा दिया है।
सरवन सिंह को 15 अगस्त को गुरु रामदास अस्पताल वल्ला से गुरुनानक देव अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित कोरोना वॉर्ड में रेफर किया गया था। उसे सांस लेने में तकलीफ थी। जांच के दौरान उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सरवन सिंह शराब और अफीम सेवन का आदी था। छलांग लगाने से उसके सर, पांव व शरीर के कई हिस्सों की हड्डियां टूट गईं थीं।
नींद न आने व पेट में दर्द की थी शिकायत : डॉ. रमन शर्मा
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. रमन शर्मा ने कहा कि वह रविवार रात आठ बजे कोरोना वॉर्ड में सरवन सिंह से मिलकर आए थे। उसने नींद न आने व पेट में दर्द की शिकायत की थी। डॉक्टरों ने उसे इंजेक्शन लगा दिया। साथ ही मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग भी करवाई। इसके बाद वह सो गया था। अगले दिन सुबह सूचना मिली कि उसने आत्महत्या कर ली है। डॉ. रमन के अनुसार मरीज नशा सेवन का आदी था। हो सकता है कि नशा न मिलने की वजह से उसने आत्महत्या की हो।
एडीसी ने की मामले की जांच
मामले की जांच के लिए एडीसी हिमांशु अग्रवाल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव देवगण, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. रमन शर्मा के साथ बैठक कर निर्णय किया कि अस्पताल के बाहर की तरफ लगी खिड़कियों के शीशों की बजाय ग्रिल लगाई जाएंगी। एडीसी ने कहा कि अभी तक यह सुनिश्चित नहीं हुआ है कि मरीज तनाव में था।