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Amritsar News: ढडरियांवाले की माफी पर विवाद, अब पंथक उठापटक पर नजर

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-माफी के फैसले को बताया जा रहा टकसाल को कमजोर करने की साजिश
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पंकज शर्मा
अमृतसर। सिख प्रचारक रंजीत सिंह ढडरियांवाले को श्री अकाल तख्त से माफ किए जाने के फैसले की पंथक क्षेत्रों में खासी चर्चा है। इस पर विवाद भी शुरू हो गया है। चर्चा यह भी है कि क्या कड़ाह प्रसाद चढ़ाया जाना भी अब धार्मिक सजा के रूप में मान्य होगा। पर्दे के पीछे चली राजनीति के बाद अब संगत के नजरें भविष्य में होने वाले पंथक उठापटक पर हैं।
उधर, शिरोमणि अकाली दल के सूत्रों का कहना है कि दमदमी टकसाल को कथित तौर पर कमजोर करने के लिए भी रंजीत सिंह ढडरियांवाले को अकाल तख्त साहिब से बिना कोई सख्त सजा दिए माफीनाम दे दिया गया। एक एक सुनियोजित राजनीति का हिस्सा है।
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पंथक क्षेत्रों में यह भी चर्चा है कि पंजाब के तख्त साहिबों के जत्थेदारों, जिन्होंने सुखबीर बादल को धामिक सजा अकाल तख्त से सुनाई थी, उनको एसजीपीसी की ओर से हाल में हटा दिया गया। उनकी जगह नए जत्थेदार नियुक्त कर दिए गए। उनको सिख पंथ के एक बड़े हिस्से ने जत्थेदारों के रूप में स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में दमदमी टकसाल के बाबा हरनाम सिंह धुम्मा ने एसजीपीसी का घेराव कर एलान किया था कि 15 दिनों के भीतर हटाए गए जत्थेदारों को उनको पदों पर बहाल किया जाए। अगर एसजीपीसी पुराने जत्थेदारों को बाहर नहीं करती है, तो दमदमी टकसाल संघर्ष करेगी।
दमदमी टकसाल के इस विरोध को मुख्य रख दमदमी टकसाल के विरोधी सिख प्रचारक रंजीत सिंह ढडरियांवाले को कथित तौर पर अकाली दल नेतृत्व ने आपने साथ जोड़ते हुए नजदीक लाकर अकाल तख्त के जत्थेदार के माध्यम से ढडरियांवाले को अकाल तख्त से माफी दिलवाई गई। ढडरियांवाले को माफी देने के संबंध में चाहे दमदमी टकसाल ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन टकसाल के विद्यार्थी कहते हैं कि इस माफीनामे के पीछे सुनियोजित राजनीति है। उधर, भाजपा नेता व सिख बुद्धिजीवी प्रो. सरचांद सिंह कहते हैं कि यह अच्छी बात है कि रंजीत सिंह ढडरियांवाले लंबे समय के बाद आखिर अकाल तख्त की शरण में आ ही गए है, लेकिन इसके पीछे जो राजनीति चल रही है, उससे विवाद बढ़ेगा।
विवाद गहरा होता देख अकाल तख्त साहिब के सचिवायल ने बयान जारी कर कहा कि बुधवार को पांच सिंह साहिबान की बैठक में तख्त श्री पटना साहिब संबंधी लिया गया फैसला कोई नया मामला नहीं। सचिवालय के रिकाॅर्ड के अनुसार पिछले लंबे समय से लटकते आ रहे मामले को ही विचार कर कार्रवाई की गई है। अब जब ज्ञानी रंजीत सिंह गौहर ने भी उनका मामला हल करने के लिए दोबारा प्रार्थना पत्र भेजा है।
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अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं
सचिवलाय की ओर से कहा गया कि तख्त श्री पटना साहिब से जो ग्रंथी सिंहों ने बुधवार को श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती देने की कोशिश की है। इस का अधिकार पांच प्यारों के पास नहीं है।
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