रणजीत सिंह टडरिया वाले के खिलाफ अकालतख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को ज्ञापन सौंपते सिख ज?
- फोटो : AMRITSAR
मालवा में सिख धर्म का प्रचार करने वाले और कई बार पंथक विवादों में फंसे रणजीत सिंह ढढरियांवाले द्वारा दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह व सिख इतिहास की नायिका माई भागो के विरुद्ध आपत्तिजनक प्रचार करने का मामला श्री अकाल तख्त साहिब पहुंच गया है। वीरवार सुबह कई सिख संगठनों ने ढढरियांवाले के विरुद्ध श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरजीत सिंह को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में कहा है कि ढढरियांवाले का सिखी प्रचार सिख धर्म के विरुद्ध और सिख कौम के भीतर जंग शुरू करने की साजिश का एक हिस्सा है। ढढरियांवाले ने अपने प्रवचन में श्री गुरु गोबिंद सिंह और माई भागो के सम्मान में गुस्ताखी की है।
इन सिख संगठनों ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह से आग्रह किया कि ढढरियांवाले को श्री अकाल तख्त साहिब में तलब कर उनसे सिख धर्म के विरुद्ध किए जा रहे प्रचार का स्पष्टीकरण मांगा जाए। यदि वह अकाल तख्त साहिब में पेश नहीं होते, या उनका कोई भी स्पष्टीकरण नहीं आता तो उनके विरुद्ध सिख मर्यादा व परंपरा के अनुसार कार्रवाई की जाए।
ज्ञानी हरजीत सिंह ने सिख संगठनों के नेताओं को विश्वास दिलाया कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। इस कमेटी की रिपोर्ट के बाद इस मामले पर पांच सिंह साहिब के आगामी बैठक में विचार किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति या प्रचारक को सिख धर्म व इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं करने दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट जाने का विचार त्याग दें बिट्टू : भाई खालसा
दमदमी टकसाल के मुखिया संत हरनाम सिंह खालसा ने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के परिवार को बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने के फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के निर्णय को मानवीय आधार पर त्याग देने की अपील की है। संत खालसा ने सांसद रवनीत बिट्टू से कहा कि राजोआना के मामले को राजनीतिक पक्ष से नहीं देखा जाना चाहिए। वह 23 साल जेल की सजा काट चुका है। राजोआना का मामला सिखों की भावनाओं से जुड़ा है। लंबा समय बीत जाने के बात केंद्र सरकार ने जिलों में सजा काट रहे सिखों की रिहाई के लिए कदम उठाया है, तो उसका स्वागत होना चाहिए। श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के ऐतिहासिक अवसर पर भाई राजोआना की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली गई है, आठ अन्य कैदियों को रिहा करने की घोषणा हुई है उससे देश व पंजाब में अच्छा प्रभाव देखने को मिलेगा। इन कैदियों की रिहाई से शांति को कोई भी खतरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बेअंत सिंह की बेटी गुरकमल कौर ने 2007 और 2012 में राजोआना की फांसी की माफी की वकालत की थी। यह सराहनीय कदम था। राजोआना ने कभी खुद को बचने का प्रयास नहीं किया है, कानून का सामना किया है। इसलिए सांसद बिट्टू सुप्रीम कोर्ट जाने का विचार त्याग दें।
रणजीत सिंह टडरिया वाले के खिलाफ अकालतख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को ज्ञापन सौंपते सिख ज?- फोटो : AMRITSAR