पंजाब के मुख्यंत्री भगवंत मान का कहना है कि वह बाहर मुख्यमंत्री हैं, लेकिन जब घर पर होते हैं तो वह आम इंसान की तरह होते हैं। क्योंकि घर वह अपनी पत्नी की ही सुनते हैं। पत्नी कई बार तो अंग्रेजी में बहुत कुछ बोल देती है।
मैं घर में मुख्यमंत्री नहीं हूं, वहां पर मेरे आदेश नहीं चलते। घर पर मैं भी अन्य लोगों की तरह आम इंसान बन जाता हूं। घर पर पत्नी की ही सुनना पड़ती है। यह कहना है पंजाब के मुख्यंत्री भगवंत मान का।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर खालसा कॉलेज फॉर वुमन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने छात्राओं को जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कई गुरुमंत्र दिए। सवाल-जवाब सेशन में छात्राओं ने उनसे कई सवाल भी किए।
एक छात्रा ने उन्हें पूछा कि घर में भी वह मुख्यमंत्री होते हैं या आम इंसान तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया कि वह घर जाते ही आम इंसान बन जाते हैं। घर जाकर वह अपनी पत्नी को ही सुनते हैं। उनकी पत्नी डॉक्टर है तो कई बार तो वह अंग्रेजी में ही बहुत कुछ बोल देती है। कहा कि घर में मेरे आदेश नहीं चलते वहां मैं आम लोगों की तरह की पत्नी की सुनता हूं। वहां उनके ही आदेश चलते हैं।
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पंजाब सरकार देगी नौकरी
उन्होंने छात्राओं से कहा अगर जीवन में सफलता हासिल करनी है तो उसके लिए कड़ी मेहनत सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब वह स्टेज शो करते थे तब से ही समाज विरोधी कुरीतियों के खिलाफ व्यंग्य कसते थे। आज भी वह यहीं कर रहे हैं। आज समय बदल गया और वह आदेश कर सकते हैं। अगर कुछ गलत हो रहा है या हथियार आदि के गीत आते हैं तो वह उन्हें लेकर सख्त हैं। उन्होंने कहा कि वह इस कुरीति को बंद करने में लगे हुए हैं। मान ने छात्राओं को राजनीति में आने की भी अपील की और कहा कि वह जीवन में संघर्ष करें और शिक्षा हासिल करें। मेरिट में आएं, पंजाब सरकार उन्हें नौकरी देगी।
महिलाएं आज भी शोषण का शिकार- डॉ. काकड़ा
फोक्लोर रिसर्च अकादमी ने प्रगतिशील लेखक संघ अमृतसर की इकाई के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को समर्पित एक सेमिनार आयोजित किया। इसमें डॉ. अरविंदर कौर काकड़ा को मरहूम विमला डांग पुरुस्कार देकर सम्मानित किया गया। नताशा नर्वाल को मानवाधिकार कार्यकर्ता और शांति के राजदूत आसमां जहांगीर पुरस्कार और 11-11 हजार नकदी पुरस्कार दिया गया। डॉ. अरविंदर कौर काकड़ा ने कहा कि हम महिलाओं की आजादी की बात करते हैं, क्योंकि महिलाएं आज भी गुलाम हैं, महिलाओं का शोषण आज भी जारी है, महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। सम्मानित की गईं महिलाओं के सम्मान पत्र कोमलप्रीत कौर और हरजीत सिंह सरकारिया ने पढ़े। नई दिल्ली से आई पिंजरा तोड़ संस्था की नेता नताशा नर्वाल ने कहा कि आज हम बहुत नाजुक दौर से गुजर रहे हैं, महिलाएं आज समाज के डर से घरों में कैद होकर रह गई हैं। सीपीआई नेता दसविंदर कौर ने कहा कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के बारे में सोचना बड़ी बात है। डाॅ. इंद्रजीत गिल ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकार पाने के मकसद से काफी संघर्ष करना पड़ा है।