आतंकवादी व कट्टरपंथी संगठनों की करतूतों से आहत होकर अफगानिस्तान व पाकिस्तान को अलविदा कह कर भारत में शरण के लिए इन देशों के नागरिकों को तीन दशक बाद भी भारतीय नागरिकता नहीं मिली है। पाकिस्तान व अफगानिस्तान से पलायन कर भारत आए इन देशों के सिख नागरिकों ने मंगलवार सुबह श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से मुलाकात कर उन्हें भारत सरकार के नाम मांगपत्र सौंपा, जिसमें केंद्र सरकार से मांग की गई की भारत में शरण लिए अफगान नागरिकों को स्थायी नागरिकता दी जाए।
अफगानी नागरिक सुरवीर सिंह ने कहा की वह अपने परिवार के साथ 30 वर्ष पहले कट्टरपंथियों व आतंकवादियों की धमकियों से तंग आकर भारत में शरणार्थी बन कर पहुंचा था। भारत में उसे परिवार सहित रहने का ठिकाना तो मिला, लेकिन नागरिकता नसीब नहीं हुई। अफगानिस्तान से आए कई सिख परिवार अब वापिस वहां नहीं लौटना चाहते। उनकी दूसरी व तीसरी पीढ़ी भी यहां पैदा हुई है। उनके कारोबार भी यहां है। स्थायी नागरिकता न होने के कारण अफगान नागरिकों को हर वर्ष अपने वीजा का नवीनीकरण करवाना पड़ता है। सरकारी स्कीमों का कोई लाभ नहीं मिल पाता।
जत्थेदार को पलायन करने की व्यथा बताते हुए सुरवीर सिंह ने कहा की आतंकवादी व कट्टरपंथी उनकी बेटियों को जबरन उठा कर ले जाते व बलात धर्म परिवर्तन कर मुस्लिमों से शादी करवाई जाती रही है। यह सिलसिला आज भी नहीं रुका है। अफगानिस्तान में कई एतिहासिक गुरुद्वारा साहिबान पर कब्जा है। कारोबारी सिखों को अगवा कर उनसे फिरौती मांगी जाती रही है।
शिष्टमंडल ने जत्थेदार को बताया आज भी इन देशों से सिखों का पलायन नहीं रुका है। कनाडा सरकार ने अफगानिस्तान में बसे सिखों को नागरिकता देने की घोषणा की है। भारत सरकार ने भी सीसीए पास कर दिया है। कानून बन जाने के बावजूदअभी तक उस पर अमल नहीं हो रहा है। इससे भविष्य की चिंता पैदा हो रही है।
एसजीपीसी केंद्र सरकार के समक्ष उठाएगी मामला: जत्थेदार
जत्थेदार ने शिष्टमंडल को विश्वास दिलाया की उनका मांगपत्र वह एसजीपीसी को भेज देंगे। एसजीपीसी पूरा मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाएगी।