श्री हरिमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब और बाबा अटल राय साहिब में सजाए गए जलौ
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। एसजीपीसी ने छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी का गुरतागद्दी दिवस श्री अकाल तख्त साहिब पर मनाया। इस दौरान श्री हरिमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब और गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाए गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर माथा टेका और गुरु साहिब को श्रद्धा भेंट की।
छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब के गुरतागद्दी दिवस के संबंध में श्री अकाल तख्त साहिब पर श्री अखंड पाठ साहिब का भोग डाला गया। श्री हरिमंदिर साहिब के हजूरी रागी जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया। भाई प्रेम सिंह द्वारा प्रार्थना की गई और श्री अकाल तख्त साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गुरमुख सिंह द्वारा संगत को हुकमनामा श्रवण करवाया गया।
कार्यक्रम के दौरान श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी व श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने संगत को मीरी-पीरी के मालिक छठे पातशाह के गुरतागद्दी दिवस की बधाई देते हुए कहा कि श्री अकाल तख्त ही स्रोत है, सिखों की शक्ति और उसके नेतृत्व में एकत्रित होकर बड़ी शक्तियों के खिलाफ लड़ने का। सिख पंथ का इतिहास रहा है जब भी कोई चुनौती आती है तो अकाल तख्त से दिशा लेकर सिख विजय हासिल करते हैं। पंथक एकता व्यक्त कर श्री अकाल तख्त साहिब की छत्रछाया में पंथक शक्ति को मजबूत करना प्रत्येक सिख का कर्तव्य है।
गुरतागद्दी दिवस के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब में आयोजित समारोह के दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी गुरमुख सिंह, ज्ञानी मलकीत सिंह, धर्म प्रचार कमेटी के सदस्य भाई अजायब सिंह अभियासी, सचिव प्रताप सिंह, अपर सचिव कुलविंदर सिंह रामदास, बलविंदर सिंह काहलवां, प्रीतपाल सिंह, मैनेजर, भगवंत सिंह धंगेरा, उप सचिव गुरचरण सिंह कुहाला, जसविंदर सिंह जस्सी, बलविंदर सिंह खैराबाद उपस्थित थे।
धामी ने संगत को श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के गुरु गद्दी दिवस पर दी बधाई एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के गुरतागद्दी दिवस पर संगत को बधाई संदेश में कहा कि छठे पातशाह ने मीरी पीरी की दो कृपाण धारण करके सिख धर्म में भक्ति और शक्ति के सिद्धांतों की पुष्टि की। उन्होंने पूरे पंथक को श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति समर्पित होने और बाणी व बाणे को धारण करके अपना जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।
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