अगर सिख इतिहास को देखा जाए तो गुरु साहिबान, जरनैल व योद्धाओं ने कई महान युद्ध लड़े हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में बदलाव करने की हिम्मत योद्धा में होती है, जो सिखों में कूट कूट कर भरी है। इस अवसर पर ब्रिगेडियर केएस काहलो ने स्टाफ व विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए सिखों के शानदार इतिहास व देश की तरक्की व उन्नति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान अन्य भाषाओं पर ज्ञान के अलावा अपने गौरवमयी सिख इतिहास के बारे प्रकाश डालना जरूरी है।
इस अवसर पर खालसा कॉलेज गवर्निंग कौंसिल के सदस्य व ग्लोबल एलुमनी आर्गनाइजेशन के अंतर्राष्ट्रीय प्रधान दविंदर सिंह छीना ने अपने संबोधन में सिखों के बलिदान व इतिहास के बारे में अवगत कराया।
इस अवसर पर प्रिंसिपल गिल ने आए मेहमान का धन्यवाद करते हुए कहा कि बड़े गर्व की बात है कि ब्रिटिश सेना का शिष्टमंडल शहीद हुए सिखों को श्रद्धांजलि भेंट करने के लिए पहुंचा। इस अवसर पर उनके साथ फाउंडेशन के सदस्य कमलजीत कौर गिल, भुपिंदर सिंह हालेंड, डा जीएस वालिया, गुरिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह भटटी, अशोक चौहान, अंडर सचिव डीएस रटौल आदि मौजूद थे। गुरु नगरी पहुंचा यह शिष्टमंडल आज श्री हरिमंदिर साहिब में नतमस्तक होने के बाद जलियांवाला बाग वार मेमोरियल भी गया।