एक निजी अस्पताल में दाखिल एक मरीज को अस्पताल प्रबंधकों की ओर से अन्य अस्पताल में रेफर न करने पर हंगामा हुआ। मामला बिगड़ने पर अस्पताल प्रबंधकों ने आननफानन में मरीज को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया।
बाबा दीप सिंह नगर निवासी अमनदीप सिंह (31) की करीब दस दिन पहले अचानक हालत बिगड़ने पर उसे मैक्स अस्पताल बठिंडा में दाखिल करवाया गया।
मैक्स अस्पताल में दो दिन दाखिल रहने के बाद जब उसकी हालत में कोई सुधार न हुआ तो उसे कालड़ा अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉ. कालड़ा की ओर से मरीज अमनदीप सिंह का इलाज शुरू करने के बाद उसकी हालत में सुधार होना शुरू हो गया।
करीब चार दिन तक कालड़ा अस्पताल में दाखिल रहने के बाद 17 जून को उसकी हालत फिर से बिगड़ गई। इसके बाद डॉ. कालड़ा ने मरीज अमनदीप सिंह को दिल्ली हार्ट इंस्टीट्यूट ऑफ मल्टीपपर्स अस्पताल में रेफर कर दिया। अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की हालत को नाजुक बताते उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रख दिया। वहीं उन्हें मरीज की हालत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
मरीज के मामा सतपाल सिंह, चचेरी बहन जसविंदर कौर और चचेरे भाई कमलदीप सिंह ने बताया कि अमनदीप को वेंटिलेटर पर रखे पांच दिन हो चुके हैं, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था।
परिजनों ने बताया कि जब रविवार सुबह उन्होंने दोबारा अस्पताल के डॉक्टरों से उनके मरीज को रेफर करने की बात कही तो वे टालमटोल करने लगे। इसे मजबूर होकर उन्हें अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करनी पड़ी। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज को पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया।
निजी अस्पताल के डॉ. केएल बांसल (एमडी मेडिसन) ने बताया कि मरीज अमनदीप सिंह की कोई जहरीली चीज निगलने से हालत गंभीर थी।
जिस दिन उसे उनके अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, उसी दिन उनकी टीम ने मरीज की गंभीर हालत के बारे में परिजनों को बता दिया था। साथ ही कह दिया था कि अगर वह मरीज को रेफर करवाकर किसी अन्य अस्पताल में ले जाना चाहते हैं, तो लेकर जा सकते हैं।