शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से एक जनवरी को बर्खास्त किए गए श्री अकाल तख्त साहिब के पंच प्यारों ने शनिवार को गुरमता जारी कर पांचों तख्तों के जत्थेदारों का सामाजिक बायकाट करने का सिख कौम को आदेश जारी किया।
श्री अकाल तख्त साहिब के पंच प्यारों की ओर से जारी किए गए पहले के गुरमता को लागू न करने के लिए एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ और एसजीपीसी के मुख्य सचिव हरचरण सिंह को दोषी घोषित किया गया है। पंच प्यारों ने सिख कौम को आदेश दिए हैं कि मक्कड़ और हरचरण सिंह को उक्त मामले में दोषी पाए जाने के लिए सजा दी जाए और इसका फैसला सिख कौम खुद करे।
पंचों प्यारों ने गुरुद्वारा रामसर साहिब में एक बैठक करके यह भी गुरमता जारी किया कि इस समय श्री अकाल तख्त साहिब से गलत फैसले जारी किए जा रहे हैं। इसलिए सिख कौम खुद हल निकाले ताकि भविष्य में कोई भी अपने स्वार्थों के लिए श्री अकाल तख्त साहिब का उपयोग गलत ढंग से न कर सके। एसजीपीसी की ओर से बर्खास्त प्यारों ने श्री अकाल तख्त साहिब शनिवार को बैठक करके अपने गुरमते जारी करने का पहले ही एलान किया था। इसके चलते पुलिस, सिविल और एसजीपीसी प्रशासन ने पूरे व सख्त प्रबंध किए थे। सिविल पुलिस और खुफिया तंत्र का सरकार की ओर से श्री हरिमंदिर साहिब में पूरी तरह जाल बिछाया गया था।
शहर के लगभग सभी पुलिस थानों के प्रभारी, आधी दर्जन के करीब डीएसपी और करीब चार एसपी और भारी संख्या में सिविल ड्रेस में पुलिस हरिमंदिर साहिब के अंदर व बाहर तैनात थी। कथित तौर पर नजरबंद किए गए प्यारे सतनाम सिंह खंडा किसी तरह होटल से निकल कर गुरुद्वारा राम सर साहिब पहुंच गए। कुछ देर में अन्य प्यारे भी गुरुद्वारा साहिब पहुंचे। वहां पहले प्यारों ने अरदास की और बाद में सिख कौम के नाम गुरमता जारी कर दिया। इस गुरमते की प्रतियां मीडिया को भी जारी की गई।
इस संबंध में प्यारों के हस्ताक्षर वाले जारी गुरमता में कहा गया कि श्री अकाल तख्त साहिब जी के पंच प्यारों की तरफ से 2 जनवरी को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी में की गई एकत्रता में पंथक समस्याओं पर विचार करने के बाद यह फैसला लिया गया है कि श्री अकाल तख्त साहिब तथा अन्य तख्तों के जत्थेदारों की तरफ से पंथक मर्यादा और परंपरा का निरादर किए जाने के कारण उन्हें पंथ की तरफ से जत्थेदार के तौर पर कोई मानता नहीं। संगत उनका सोशल बायकाट करे।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को बार-बार इन जत्थेदारों को पद से हटाने के लिए कहा गया था पर उन्होंने इस आदेश को मानने के लिए इंकार कर दिया। इसके लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान अवतार सिंह और मुख्य सचिव आरोपी है। इन्हें सजा देने का फैसला पंथ खुद करे। गुरमता ने यह भी लिखा है कि इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं है। इस गुरमता पर पंच प्यारे भाई तिरलोक सिंह, मंगल सिंह, सतनाम सिंह खंडा, मेजर सिंह और तरलोक सिंह के हस्ताक्षर है।