पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चंडीगढ़ ने अमृतसर उपभोक्ता फोरम के 31 जनवरी 2013 के एक फैसले को अनुचित और गैर न्यायसम्मत बताते हुए खारिज कर दिया है।
आयोग ने अमृतसर के वादी प्रबोध चंद्र बाली के हक में फैसला देते हुए वादी को 25 हजार रुपये की आर्थिक क्षतिपूर्ति और करीब तीन लाख का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
आयोग ने प्रतिवादी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड बीमा कंपनी को आवश्यक ग्राहक सेवा न देने का दोषी भी करार दिया है। वादी प्रबोध बाली ने यह अपील खुद लिखी और आयोग में दायर की और खुद ही इस पर बहस भी की।
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड बीमा कंपनी ने वादी और उनकी पत्नी का 2009 में सांझा बीमा किया था और यह करार किया था कि बीमा पॉलिसी को 70 वर्ष तक की उम्र तक जारी रखा जाएगा।
बीमा कंपनी वादी के 60 वर्ष के होने पर ही अपने करार से मुकर गई और वादी को अपने और अपनी पत्नी के लिए अलग-अलग प्रीमियम के भुगतान को कहा। आरोप है कि कंपनी ने वादी की पॉलिसी को खत्म कर दिया और पहले दी गई सारी प्रीमियम राशि भी हड़प ली।
वादी ने अमृतसर उपभोक्ता फोरम में शिकायत की तो फोरम ने बीमा कंपनी को सही ठहराया। हालांकि बार बार अनुरोध करने पर भी न तो कंपनी की तरफ से असल कागजात पेश किए गए और न ही कोई गवाही करवाई गई।
इस पर प्रबोध बाली ने चंडीगढ़ आयोग के सामने अपील की। आयोग ने अमृतसर फोरम के निर्णय को गलत ठहराते हुए प्रबोध के पक्ष में फैसला सुनाया और बीमा कंपनी को मुकरने का दोषी बताया।
आयोग ने बीमा कंपनी को यह भी आदेश दिया कि वह प्रबोध और उनकी पत्नी का बीमा पहले करार के अनुसार 70 वर्ष तक जारी रखे। कंपनी इस बीच में बीमारी या अस्पताल का सारा खर्चा वादी को दे। साथ ही कंपनी पांच हजार का मुआवजा और मानसिक कष्ट देने पर बीस हजार का मुआवजा भी वादी को तुरंत दे।