जयपुर से पहुंचे एक यात्री रंजीत कुमार ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि जयपुर-अमृतसर उड़ान में मात्र 16 यात्री ही थे। हर यात्री तीन से चार लाइनों की दूरी पर बैठा हुआ था। इसलिए इस उड़ान में कम से कम सामाजिक दूरी का कोई मुद्दा नहीं था। रंजीत बीते 60 दिन से उदयपुर में फंसे थे, जहां वह एक कंपनी में काम कर रहे थे। उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है।
इसके बाद दो महीने तक एक गेस्ट हाउस में ही रहे। रंजीत ने कहा कि उन्हें घर जाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। एयरलाइंस सेवा शुरू नहीं होती तो पता नहीं कितने और दिन जयपुर में रुकना पड़ता।
टचलेस प्रक्रिया धीमी लेकिन सुरक्षित
जयपुर से आए एक अन्य यात्री सुखचंद मीणा ने कहा कि कोरोनो वायरस के मानदंडों का पालन करने में कोई समस्या नहीं, क्योंकि वे केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए है। श्री पटना साहिब जाने वाले यात्री राहुल कुमार ने कहा कि एयरपोर्ट प्रबंधन द्वारा शुरू की गई टचलेस प्रक्रिया धीमी लेकिन सुरक्षित है।
लगभग तीन महीने तक अमृतसर में फंसी पटना के एक परिवार की महिला ज्योति ने बताया की वह अपनी बहू की डिलीवरी के लिए यहां आठ मार्च को पहुंची थी। लॉकडाउन के कारण अमृतसर में फंस गई थी। 25 मार्च को वापसी की टिकट थी। 78 दिन के बाद घर लौटने की खुशी है।