जाकिया फिरदौस और पाकिस्तानी नागरिक साहिबजादा मुनादी अहमद भी बॉर्डर पर अलग हो गए। दरअसल जाकिया का पासपोर्ट भारत का है,जबकि उसकी शादी पाकिस्तान में हुई है।
पाकिस्तानी आतंकियों के हमले के बाद उपजी परिस्थितियों का खामियाजा दोनों देशों के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। दोनों देशों से लोगों का लाैटना जारी है, लेकिन कुछ महिलाएं पाकिस्तान में शादी होने के बावजूद वापस नहीं लाैट पाईं, क्योंकि उनके पासपोर्ट भारत के थे। उन्हें अब तक पाकिस्तान की नागरिकता नहीं मिली है। वो पति व बच्चों के साथ मायके आई हुई थीं।
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हालांकि बीएसएफ ने पति और बच्चों को पाकिस्तान जाने की इजाजत दे दी। महिलाओं ने कहा कि उनकी नागरिकता का मामला कोर्ट में है। इसपर
बीएसएफ ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट वालों को जाने की इजाजत नहीं दे सकते। इस तरह एक पासपोर्ट की वजह से परिवार दो हिस्सों में बंट गए।
परिवार के पास भेजे भारत सरकार : जाकिया फिरदौस और पाकिस्तानी नागरिक साहिबजादा मुनादी अहमद भी बॉर्डर पर अलग हो गए। दरअसल जाकिया का पासपोर्ट भारत का है,जबकि उसकी शादी पाकिस्तान में हुई है।
वहीं, अरूदा ने कहा कि वह अपने परिवार के पास लौटना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि हुकूमत से गुजारिश है कि उन्हें पाकिस्तान जाने दिया जाए
मैं यहीं रह गई : शनिजा ने बताया कि 15 साल पहले उसकी शादी कराची में हुई थी। मायका दिल्ली में है और माता-पिता से मिलने आई थी। सरकार के आदेश के बाद वह अटारी बाॅर्डर पहुंची, तो वापसी की इजाजत नहीं मिली।
वाघा-अटारी बॉर्डर से शुक्रवार शाम तक 416 भारतीय नागरिक स्वदेश लौट आए। वहीं, 215 पाकिस्तानी नागरिक अपने वतन लौटे।