तरनतारन जिले की 73 वर्षीय हरजीत कौर को अमेरिका ने अवैध प्रवास के आरोप में बेड़ियों में जकड़कर भारत निर्वासित किया। इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा और भारतीय समुदाय द्वारा विरोध किया गया।
श्री खडूर साहिब। 1992 में अपने बेटों गुरपिंदर सिंह और राजविंदर सिंह के पास अमेरिका गई 73 वर्षीय बुजुर्ग महिला हरजीत कौर को अमेरिका ने निर्वासित कर वापस भेज दिया। बुजुर्ग हरजीत कौर को उनकी उम्र की परवाह किए बिना बेड़ियों में जकड़कर भारत वापस भेजने की काफी निंदा हो रही है। वर्तमान में हरजीत कौर दिल्ली में अपने करीबी रिश्तेदारों के साथ रह रही हैं।
तरनतारन जिले के पंगोटा गांव निवासी कुलवंत सिंह ने बताया कि उनके बहनोई सुखविंदर सिंह का निधन हो गया था जिसके बाद उनकी बहन हरजीत कौर अपनी बेटियों के पास अमेरिका चली गई थीं। हरजीत कौर के दोनों बेटों की शादी अमेरिका में हुई है और वे ट्रांसपोर्ट का कारोबार करते हैं। हरजीत कौर लॉस एंजलिस में बुटीक चलाकर अपना गुजारा कर रही थीं। 2012 में आईसीई ने हरजीत कौर पर अमेरिका में अवैध रूप से रहने का आरोप लगाया था। इसके बाद हरजीत कौर अपने वकील के जरिये 13 साल तक अदालती चक्कर काटती रहीं। बुधवार को हरजीत कौर को 132 भारतीयों के साथ जॉर्जिया से आर्मेनिया के रास्ते दिल्ली भेज दिया गया। हरजीत कौर के भाई कुलवंत सिंह ने कहा कि अमेरिका में भारतीयों के साथ बहुत बुरा व्यवहार हो रहा है। हरजीत कौर की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए अमेरिका में भारतीय मूल के नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन भी किए थे। संवाद