अमृतसर। धोखाधड़ी के केस में अमृतसर की केंद्रीय जेल में बंद गुरदासपुर के मोहल्ला लुधियाना निवासी युनूस मसीह की गुरु नानक देव अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
कैदी के परिजनों ने युनूस की मौत के मामले में जेल और अस्पताल के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजनों के हंगामे के बाद मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। कांग्रेस नेता और अल्पसंख्यक कांग्रेस सेल के उप चेयरमैन यूनुस मसीह को धोखाधड़ी के केस में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
यूनुस को बीस दिन पहले ही अमृतसर की केंद्रीय जेल में भेजा गया। जेल में तबियत खराब होने के कारण रविवार को उसे सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया। रविवार को ही सिविल अस्पताल से डॉक्टरों ने उसे गुरुनानक देव अस्पताल में शिफ्ट कर दिया। यूनुस की पत्नी सुरजीत, बेटे राजकुमार और अन्य परिजनों ने बताया कि गुरुनानक देव अस्पताल में डाक्टरों ने यूनुस का इलाज काफी देर से शुरू किया। उन्होंने डॉक्टरों से कहा था कि अगर तबियत ज्यादा खराब है तो वह उसे किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करवा देते हैं, मगर डॉक्टरों ने बात नहीं मानी। सोमवार सुबह डाक्टरों ने यूनुस को टीका लगाया। उसके दो मिनट बाद ही युनूस की मौत हो गई। मौत के बाद परिजन गुस्से में आ गए और उन्होंने अस्पताल में हंगामा कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर उचित इलाज हो जाता तो यूनुस की मौत न होती। अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ ने भी इलाज में लापरवाही बरती है।
गुरु नानक देव अस्पताल केमेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. तेजबीर सिंह ने कहा कि मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाकर इस मामले में आरोपी पाए जाने वाले जेल और अस्पताल कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। जो भी आरोपी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी ।