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नाटक ‘दो कौड़ी का’ में दिखाए दोहरे चेहरे

Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
Amritsar
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अमृतसर। गुरु नगरी में शुरू हुए 10वें नेशनल थियेटर फेस्टिवल के तहत वीरवार को नौजवान नाटक निर्देशक ईफरा काक के निर्देशन में नाटक दो कौड़ी पेश किया गया। पंजाब नाट्यशाला में आयोजन यह नाटक बरतोलत बैंखत का लिखा है। जम्मू-कश्मीर के युवाओं की ओर से बनाए गए एमैच्योर थियेटर ग्रुप के कलाकारों ने यह नाटक पेश किया।
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नाटक की निर्देशक ईफरा काक की ओर से नाटक के संबंध में बताया गया कि यह नाटक मनुष्य के दोहरे चेहरों को प्रकट करता है। आम तौर पर मनुष्य दिन को कोई और सोच और रात्रि को कोई और सोच रखता है। दिन भर शराफत का मुखौटा पहन कर घूमता है। सामाजिक आदर्शों की बात करता है। रात को वही व्यक्ति चोर, दुराचारी, लुटेरा बन जाता है। जिन लोगों को हम गुनहगार समझते हैं, जब उनका हम विश्लेषण करते हैं तो उनके अंदर कहीं न कहीं इंसानियत छुपी होती है। लेकिन इंसानियत का ढोंग करने वाले अपराधी किस्म के लोग दिखाई देते हैं। यह नाटक मनुष्य की दोहरी मानसिकता को पेश करने के साथ साथ हास्य रास से भी भरपूर था।
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