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फंड न होने से सीवर व वाटर सप्लाई के काम ठप्प

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फंड अटका, विकास कार्यों को झटका
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अमृत योजना में मिलना था फंड, सीवर, वाटर सप्लाई का काम रुका
हलके के लोग भुगत रहे है गंदे पानी, सीवर ओवरफ्लो की समस्या
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट।
नगर निगम के पास फंड न होने के कारण शहर में वाटर सप्लाई व सीवर से जुड़े काम ठप पड़े हैं। न तो खराब सीवर लाइनें ठीक हो पा रहीं हैं और न ही वाटर सप्लाई के पाइप बदले जा रहे हैं। नतीजतन लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कई वार्डों में गंदा पानी सीवर और वाटर सप्लाई पाईपों की लीकेज के कारण देखने को मिल रही है। वहीं नगर निगम फंड के लिए सरकार की तरफ देख रहा है। नगर अफसरों का कहना है कि फंड ही नहीं आ रहे तो काम कैसे हो पाएंगे। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने जांच के नाम पर कई सिंगल टेंडरों को रदद कर दिया है। इससे भी कई काम निगम के अटके हैं।
शहर में सीवरेज व्यवस्था को सुचारु करने के लिए नगर निगम को केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत 87.37 करोड़ रुपये मिलने थे। यह फंड केंद्र सरकार ने जारी भी कर दिया था। योजना के अंतिम चरण में इस फंड को रोक दिया गया है। इस फंड से नगर निगम के अधीन आते क्षेत्रों में सीवर प्रणाली को दुरुस्त किया जाना था। कई जगहों पर सीवर लाइनों में ब्लाकेज और लीकेज की समस्या ठीक की जानी थी। इसके अलावा नई सीवर लाइनें भी बिछाई जानीं थीं।
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वाटर सप्लाई के काम भी रुकेहैं। शहर के मोहल्ला घरथौली, मोहल्ला वडैहरा, बजरी कंपनी समेत कई मोहल्लों में वाटर सप्लाई के पाइपों में लीकेज के कारण पानी गंदा आ रहा है। समस्या दूर करने के लिए पानी के पाइपों को बदलने की जरूरत है। निगम ने इसके लिए 7.25 करोड़ का टेंडर लगाया था। टेंडर में ट्यूबवेल लगाने का काम भी था। ट्यूबवेल अभी लगे ही थे कि फंड आना बंद हो गया। इससे वाटर सप्लाई पाइपें बदलने का काम रुपये गया। 13 किलोमीटर लंबी वाटर सप्लाई लाइन को बदला जाना था। अभी 7.2 किलोमीटर लाइन ही बदली गई थी कि फंड की कमी आ गई। इस संबंधी नगर निगम के एसडीओ विवितेश विरदी ने बताया कि फंड की कमी के कारण काम रुके हैं। फंड मिलते ही काम दोबारा शुरू कराए जाएंगे।
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सरकार और निगम की लड़ाई भी है वजह
सूबे में सत्ताधारी कांग्रेस और नगर निगम पठानकोट में बहुमत वाली भाजपा की लड़ाई भी फंड की कमी की वजह मानी जा रही है। स्थानीय कांग्रेसी विधायक अमित विज का कहना है कि नगर निगम के काम उच्च गुणवत्ता के नहीं हैं। सरकार सीधे तौर पर विकास करवाना चाहती है। भाजपाई मेयर अनिल वासुदेवा का कहना है कि कांग्रेस सरकार नगर निगम से सौतेला व्यवहार कर रही है। सियासी बदले के चलते फंड नहीं दिए जा रहे।
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