मनोरोगी बोले-सांसद जी! अब हम ठीक हैं, हमें घर भेज दो
ठीक हो चुके मरीजों के घर का पत्ता अस्पताल प्रशासन के पास नहीं
डायरेक्टर बोले- प्रापर्टी हड़पने के लिए ठीक हो चुके मनोरोगी को परिजन नहीं करते स्वीकार
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। सांसद जी! हम ठीक हो चुके हैं। हमें घर दो। हम अपने परिवार के साथ रहना चाहते हैं। लेकिन अस्पताल प्रशासन हमें अस्पताल से छुट्टी नहीं दे रहा है। सांसद गुरजीत औजला वीरवार को सुबह विद्यासागर मनोरोग सरकारी अस्पताल पहुंचे तो एक वार्ड में बैठे कुछ मनोरोगियों ने हाथ जोड़कर कहा हिमें इस अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकालने में मदद की जाए। मनोरोगियों की इस मांग पर सांसद कुछ पल वहां रुके, फिर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. शविंदर सिंह से पूछा कि इन्हें घर क्यों नहीं भेजा जा रहा है। इस पर डायरेक्टर ने बताया कि वो मनोरोगी हैं, जिनका पता ठिकाना उनके पास नहीं है। वह इन्हें बाहर नहीं भेज सकते। परिवार के किसी सदस्य को मनोरोगी अस्पताल में दाखिल कराने के बाद जब वह ठीक हो जाता है तो रोगी के बताये गए पत्ते गलत निकलते हैं। रोगियों को ठीक होने के बावजूद परिवार उन्हें स्वीकार नहीं करता। कई बार जो मरीज ठीक होकर घर लौटते हैं तो कुछ समय के बाद परिजन उन मरीजों को फिर से अस्पताल में दाखिल करा देते हैं। कई रोगियों के नाम पर करोड़ों की प्रॉपर्टी होती है, उसकी प्रॉपर्टी हड़पने के लिए भी परिजन मनोरोगी को घर आने नहीं देते।
पूर्व डायरेक्टर डॉ. बीएल गोयल के कार्यकाल में हुई अनियमितताओं की होगी जांच : औजला
विद्यासागर मनोरोग अस्पताल के पूर्व डायरेक्टर डॉ. बीएल गोयल के कार्यकाल में हुई अनियमितताओं की जांच होगी। दशकों तक मनोरोग अस्पताल में एकछत्र राज करने वाले डॉ. गोयल ने अपने निजी हितों की पूर्ति के लिए मनोरोग अस्पताल का इस्तेमाल किया। बेशक अब वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन फिर भी बच नहीं सकेंगे। यह बात सांसद गुरजीत सिंह औजला ने वीरवार को मनोरोग अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कही। डॉ. गोयल ने अस्पताल का बुरा हाल कर दिया है। उन्होंने नर्सिंग हॉस्टल बंद करवा दिए। कैंटीन बंद कर दी। फिर आउटसोर्सिंग के जरिये नर्सिंग स्टाफ को सुविधाएं प्रदान कीं। डॉ. गोयल ने उन लोगों को आउटसोर्सिंग का काम दिया, जिनसे उन्हें लाभ होता था। अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए उन्होंने जनता के पैसे को खुर्दबुर्द किया। उन्हें एक एक पैसे का हिसाब देना होगा। इसके लिए जांच कमेटी बिठाई जाएगी। इससे पहले सांसद औजला ने मनोरोग अस्पताल की फीमेल, मेल वार्ड्स, किचन, धोबीघाट आदि का जायजा लिया।
आटा गूंथने वाली मशीन नहीं थी साफ
औजला ने अस्पताल की रसोई का जायजा लिया। इस दौरान आटा गूंथने वाली मशीन की सफाई नहीं की गई थी। औजला ने डायरेक्टर से कहा कि मरीजों की सेहत को ध्यान में रखते हुए इसकी सफाई कराई जाए। औजला ने कहा कि सिविल अस्पताल में बंद पड़ा डायलिसिस यूनिट जल्द शुरू हो जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस यूनिट को चलाने के लिए मेडिसिन डॉक्टर की नियुक्ति कर ली है। डॉक्टर जल्द ज्वाइन करेगा। पिछले पांच महीनों से डायलिसिस सेवा बंद होने से मरीजों को भारी परेशानी हुई है। चार मरीजों की जान भी चली गई। इसके अलावा गुरुनानक देव अस्पताल में बंद पड़ी कैथ लैब, ग्लूकोज प्लांट को भी शुरू करवाया जाएगा। इसी वर्ष जिले के सभी सरकारी अस्पतालो ं का कायाकल्प होगा।
फायर सेफ्टी सिस्टम दुरुस्त होगा
औजला ने कहा कि मनोरोग अस्पताल में लगाए गए अत्याधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम का आज तक उपयोग नहीं किया गया। परिणामस्वरूप यह सिस्टम खराब हो गया है। इसे ठीक करवाने के लिए वह एस्टिमेट ले रहे हैं। आगजनी की घटना से निबटने के लिए यह सिस्टम बेहद उपयोगी है। इसे शुरू करवाया जाएगा। मनोरोग अस्पताल को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए ग्रांट स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन अभी यह रिलीज नहीं हो पाई। इसके कारणों का पता लगाकर ग्रांट जारी करवाई जाएगी और इस अस्पताल में बेहतरीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा।
अस्पताल में एमडी मेडिसिन डॉक्टर नहीं
डायरेक्टर डॉ. सविंदर सिंह ने औजला से मांग की कि अस्पताल में एमडी मेडिसिन डॉक्टर नहीं है। इससे काफी दिक्कत आ रही है। इसके अलावा अस्पताल में खाली पड़ी जगह पर खेती की जा सकती है। यदि ट्रैक्टर मिल जाए तो खेती से पैदा होने वाले अन्न से मरीजों के लिए खाना बनाया जाएगा।
अस्पताल में खुलेगी कैंटीन
मनोरोग अस्पताल में स्थापित कैंटीन बंद हो चुकी है। कैंटीन मालिक व अस्पताल के बीच पैसों के लेनदेन को लेकर निपटारा अभी अदालत में हो रहा है। दूरदराज से यहां पढ़ने के आए मेडिकल स्टूडेंट्स को खाना नहीं मिल पा रहा। डॉ. सविंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने सरकार से यहां एक अतिरिक्त कैंटीन खोलने की अनुमति मांगी थी। सरकार ने इस पर स्वीकृति दे दी है। अगले माह ही यहां कैंटीन खुल जाएगी।