गुरुद्वारा बाउली साहिब की सेवा संभाल एसजीपीसी के हवाले
जगन्नाथ पुरी मंदिर ट्रस्टियों की हाजिरी में चीफ सेक्रेटरी ने कमेटी प्रधान लौंगोवाल को सौंपी चाबी
गुरु नानक ने इस आस्था पर महान रचना ‘आरती’ का किया था उच्चारण
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। ओडिशा सरकार ने जगन्नाथ पुरी मंदिर के साथ सटे श्री गुरु नानक देव जी के चरण स्पर्श पावन अस्थान गुरुद्वारा बाउली साहिब की सेवा संभाल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को सौंप दी है। ओडिशा सरकार के चीफ सेक्रेटरी ने एसजीपीसी अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल को जगन्नाथ पुरी मंदिर ट्रस्टियों की उपस्थिति में ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब की चाबी सौंप दी। इस अस्थान पर गुरु नानक देव जी ने विश्व प्रसिद्ध महान रचना ‘आरती’ का उच्चारण किया था।
एसजीपीसी पिछले कई साल से इस ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब की सेवा संभाल के लिए ओडिशा सरकार और मंदिर ट्रस्टियों के साथ संपर्क में थी। पिछले महीने एसजीपीसी के चीफ सेक्रेटरी डॉ. रूप सिंह के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल मंदिर ट्रस्टियों से मिला था। ट्रस्टियों ने विश्वास दिलाया था कि इस संबंध में मदिर के प्रबंधक राज्य सरकार से बातचीत करेंगे। गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को देखते हुए एसजीपीसी की इस मांग को ओडिशा सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
भाई लौंगोवाल ने ओडिशा सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि एसजीपीसी इस ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में एक मनमोहक भवन का निर्माण करेगी। गुरु नानक देव जी के साथ जुड़े इस गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों के लिए देश-विदेश की संगत आएगी। इस ऐतिहासिक अस्थान की जिम्मेदारी एसजीपीसी को मिले, इसके लिए संगत की मांग थी। इस अवसर पर जगन्नाथ मदिर ट्रस्ट के प्रबंधक प्रदीप महापात्रा, चेयरमैन मंदिर ट्रस्ट बिजे साहू, ओडिशा सरकार के पर्यटक मंत्री मोहंती सहित कई गण्यमान्य लोगों को सिरोपा भेंट किया।
एसजीपीसी ने गुरुद्वारा बाउली साहिब से गुरुद्वारा दातन साहिब तक निकाला नगर कीर्तन
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने श्री गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित एक नगर कीर्तन गुरुद्वारा बाउली साहिब से गुरुद्वारा दातन साहिब कटक तक एक नगर कीर्तन निकाला। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया और पंज प्यारों की अगुवाई में निकाले गए इस नगर कीर्तन में बड़ी संख्या में संगत शामिल हुई। नगर कीर्तन से पहले हुए अरदास कार्यक्रम में भाई लौंगोवाल सहित जगन्नाथ मंदिर के सभी ट्रस्टी की साथ-साथ ओडिशा की सिख संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।