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फारिग मुलाजिमों ने एसजीपीसी की पेशकश को ठुकराया

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कर्मचारियों ने ठुकराई एसजीपीसी की अपील
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अपना केस वापस लेने और धरना खत्म करवाना चाहती थी कमेटी
अब अदालत के फैसले के अनुसार ही मुलाजिमों के भाग्य का निर्णय होगा : डॉ. रूप सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। पिछले साल नौकरी से निकाले 523 मुलाजिमों ने एसजीपीसी की उस पेशकश को ठुकरा दिया है जिसमें इन कर्मचारियों को दोबारा नौकरी में बहाल करने के लिए आगामी मंगलवार तक अपने केस वापस लेकर आने और धरना खत्म करने की अपील की गई थी। एसजीपीसी के चीफ सेक्रेटरी डॉ. रूप सिंह ने बताया कि फारिग मुलाजिमों को धरना खत्म करने के बदले बहाल करने की अपील की गई थी लेकिन मुलाजिम अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।
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एसजीपीसी के महासचिव गुरबचन सिंह करमूवाल, सदस्य भगवंत सिंह स्यालका, भाई राम सिंह सहित कई अधिकारियों ने इस मामले के हल के लिए कई प्रयास किए हैं। एसजीपीसी के प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल के साथ विचार-विमर्श के बाद फारिग मुलाजिमों को आज ही धरना उठाने व मंगलवार तक केस वापस लेने की शर्त मानने पर एसजीपीसी द्वारा दिहाड़ीदार मुलाजिमों को पहले की तरह मिलने वाली दिहाड़ी, ठेके पर रखे कर्मचारियों को एक साल के ठेके पर मिल रहे वेतन और बिलमुक्ता मुलाजिमों की पिछली छुट्टी बिना वेतन स्वीकार कर उनकी हाजिरी लगा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि दुख है कि मुलाजिम अपनी जिद पर अड़े हैं। एसजीपीसी द्वारा बहाली के लिए दी गई पेशकश को ठुकरा कर बातचीत के रास्ते बंद कर दिए हैं। अब इन कर्मचारियों को कानूनी प्रक्रिया द्वारा ही अपने पक्ष रखना होगा। अदालत जो भी निर्णय देगी एसजीपीसी उसे स्वीकार करेगी।
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