ड्रेगन डोर ने खत्म कर दी लोहड़ी की पतंगबाजी
लोहड़ी के गीत भूले युवा, मुन्नी बदनाम हुई जैसे गीत हैं याद
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
लोहड़ी पंजाब तो मकर संक्राति उत्तर प्रदेश व बिहार का मुख्य त्योहार माना जाता है। पंजाब में लोहड़ी मांगने की प्रथा आज भी जिंदा है लेकिन अधिकांश युवाओं को लोहड़ी के गीत भूल गए हैं। फिल्मी गाने याद हैं। मुन्नी बदनाम हुई गीत जुबानी याद है लेकिर पंजाब सभ्याचार से जुड़ा लोहड़ी गीत ‘सुंदर मुंदरिए हो, तेरा कौन विचारा, दुल्ला भट्ठी वाला...’ इस मुखड़े के आगे युवा सोचने पर मजबूर हो रहे हैं कि आगे की लाइनें क्या है।
अमर उजाला ने खालसा कालेज व जीएनडीयू के कई छात्र-छात्राओं से लोहड़ी के पर्व पर बातें की तो आश्चर्य हुआ कि अधिकांश युवा फिल्में गानों के बारे में विस्तार से बात करने को तैयार हो गया। लेकिन उसे लोहड़ी का महत्व व उससे जुड़े लोकगीत याद नहीं थे।
बीएससी कर रही हरमनप्रीत कौर कहती है कि अब त्यौहारों के बारे में न स्कूल-कालेज और न ही किताबें कुछ बताती हैं। घर में भी दौड़ती जिंदगी के आगे ऐसे ज्ञान परिजन नहीं दे पाते। नतीजा आज का युवा अपने संस्कारों को भूल रहा है अपनी सभ्यता से अंजान दिख रहा है।
जीएनडीयू में रिसर्च कर रहे मुख्तार सिंह कहते हैं कि अब तो त्योहार केवल कैलेंडर में दिखते हैं। त्योहारों मनाने का तरीका बदलता जा रहा है। आज का युवा सोशल मीडिया पर बिजी है, लेकिन सोशल मीडिया में अधिकांश युवा वही देखते हैं जिसे देखने से परिजन रोकते हैं।
गलती सरकार और समाज की है: देवदर्द
साहित्यकार व पंजाबी लेखक सभा एवं जनवादी लेखक सभा के पदाधिकारी देवदर्द कहते हैं कि गलती सरकार व समाज की है। आज के युवाओं को हम संस्कार व सभ्यता के बारे में न बताते हैं और न पढ़ाया जाता है। राज्य की सरकारों को चाहिए कि वो अपने लोकगीत और त्योहारों के किताबों में सिलेबस डालें, ताकि युवा सभ्यता व संस्कारों के बारे में जान सके।
गिद्दा और भंगड़ा के साथ मनाई लोहड़ी
खालसा कालेज व खालसा कालेज फॉर वुमन में शुक्रवार को लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। स्टूडेंटों ने जहां लोहड़ी पर आग जलाकर लोहड़ी पर्व मनाया वहीं लोहड़ी के शगुन के गीत गाए। अमृतसर के कई स्कूलों में शुक्रवार को ही लोहड़ी का पर्व मनाया गया। कल लोहड़ी की स्कूल-कालेजों में अवकाश है।