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बुधवार की शाम को पंजाब नाटशाला में नाटक विआ दे वाजे का हुआ मंचन

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विआ दे वाजे नाटक का मंचन
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अमृतसर। पंजाब नाटशाला में बुधवार शाम को नाटक विआ दे वाजे का मंचन किया गया। अमनदीप निर्देशित इस नाटक की कहानी पिता और उसके तीन बेटों के ईदगिर्द घूमती है। पिता की खानदानी जमीनी-जयदाद होने के चलते उसके दो बेटे कोई काम-काज नहीं करते और सारा दिन आवारागर्दी करते हैं। इसके चलते पिता परेशान रहता है। क्योंकि बड़ा बेटा शादीशुदा होता है, वह सोचता है कि वह दोनों भी कोई कामकाज करें और उनकी शादी हो जाएं।
कुछ समय बीतने के बाद भी जब दोनों बेटे नहीं समझते तो वह उन्हें कुछ दिनों का समय देकर कहता है कोई काम करो और अपनी शादी के लिए लड़कियां भी तलाशें नहीं तो वह अपनी सारी धन-दौलत शादीशुदा लड़के के नाम कर देगा। इसके चलते वह परेशान हो जाते है। अंत में पिता की दौलत पाने के लिए वह दोनों शादी कर लेते हैं। पिता की दौलत के हिस्से होने की बात पर बड़े बेटे की नीयत खराब हो जाती है। घर में आए दिन झगड़े होने शुरू हो जाते हैं। घर का माहौल खराब हो जाता है। पिता उन्हें समझाता है और अपनी संपत्ति तीनों बेटों में बांटकर मेहनत करने और आपस में मिलकर रहने की सलाह देता है।
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नाटक में रछपाल ढिल्लों, शुक्रगुजार सिंह, प्रीतिका शर्मा, काजल शर्मा, विशाल रामपाल, विजय कुमार, निखिल अग्रवाल, दिव्यजोत कौर, बलजीत सिंह, युगम अरोड़ा, अतुल शर्मा, पावेल, कमलमीत कौर, विशाल शर्मा, डिंपल, हरलीन कौर और अंकुश ने भूमिका निभाई। नाटक के अंत में पंजाब नाटशाला की ओर से जतिंदर बराड़ ने कलाकारों को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। साथ ही दर्शकों से रूबरू होते हुए कहा कि नाटक हमारे समाज के युवाओं को संदेश देता है कि बुजुर्गों की दौलत पर ऐश करने की बजाय हमें अपनी मेहनत और लगन से आगे बढ़ना चाहिए।
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