वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड की टीम ने जसवंत गिल को किया सम्मानित
गिल के किस्से से प्रभावित होकर फिल्म कैप्सूल गिल बना रहे अक्षय
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। अमृतसर कल्ब में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड की टीम ने अवार्ड सेरेमनी समारोह का आयोजन डॉ. सरप्रीत सिंह गिल की अध्यक्षता में किया गया। 29 साल पहले 16 नवंबर 1989 के दिन पश्चिम बंगाल के रानी गंज की 330 फुट गहरी महाबीर कोयले की खदान से 65 लोगों जिंदा बचाने वाले इंजीनियर जसवंत सिंह गिल को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड देने पहुंची टीम उनकी जोखिम भरी बहादुरी के आगे नतमस्तक होने से नहीं रही। अवार्ड देने के बाद टीम के नुुमाइंदे तथा वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड, लंदन के पंजाब प्रभारी रणदीप कोहली, प्रो. राजीव शर्मा, बरकत वेलफेयर सोसाइटी की कोआर्डिनेटर मिनी कोहली ने इंजीनियर जसवंत सिंह गिल को अवार्ड देकर सम्मानित किया।
बता दें गिल दुनिया के ऐसे व्यक्ति हैं, जिसने अपनी सूझबूझ से आपातकाल में लोहे का अद्भुत कैप्सूल बनाया और खदान प्रबंधन तथा सरकार के मना करने के बावजूद अकेले खतरनाक खदान में घुसे और छह घंटे की मेहनत के बाद सभी को जिंदा निकालने के बाद आखिर में खुद बाहर आए। वह कहते हैं कि शायद परमात्मा ने उनको इन लोगों की जिंदगी बचाने के लिए ही धरती पर भेजा था।
अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा गिल के बेटे डॉ. सरप्रीत सिंह गिल ने बताया कि उनकी इस बहादुरी के लिए 1991 में तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा उनको सर्वोत्तम जीवन रक्षा पद से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा दूसरे राज्यों तथा गैर सरकारी संगठनों ने उनकी बहादुरी पर उन्हें सम्मानित किया हुआ है। बताते चलें कि गत साल अभिनेता अक्षय कुमार उनकी बहादुरी के किस्से से प्रभावित होकर उन पर फिल्म ‘कैप्सूल गिल’ (ब्लैक डायमंड) का निर्माण कर रहे हैं, जो इसी साल रिलीज होनी है।
भारतीय इतिहास में तीन ऐसी घटनाएं
भारतीय इतिहास में तीन ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब सरकारों ने हाथ खड़े कर दिए, लेकिन उनके अगुवाओं ने आगे बढ़ते हुई इतिहास रचा। पहली कड़ी है सारागढ़ी की जंग, जिसमें बर्तानवी हुकूमत ने 21 सिख सूरमाओं को 14 हजार पठानों से लोहा लेने से मना कर दिया था, लेकिन कमांडर ईशर सिंह ने सरकारी फरमान को नकारते हुए जंग लड़ी और शहादत देते हुए दुश्मन को शिकस्त दी। दूसरी घटना लोंगेवाल राजस्थान में 1971 के दौरान 3000 पाकिस्तान सैनिकों से लोहा लेने वाले 94 सिख जवान थे। इनके अगुवा ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी को भी सरकार ने वापस आने को कहा था, लेकिन चांदपुरी ने मुट्ठी भर साथियों के साथ लोहा लिया और दुश्मन को धूल चटाई। बाद में उन पर फिल्म बॉर्डर बनी। तीसरी घटना इंजीनियर गिल की है, जिन्होंने कोयला खदान प्रबंधन तथा सरकार के मना करने के बावजूद खुद की जान जोखिम में डाल खदान में अकेले घुस कर 65 लोगों को जिंदा निकाला।