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जरूरत पडने पर मुलाजिमों का पीएफ खर्च करता है निगम

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पीएफ घोटाले के आरोपों से घिरा नगर निगम
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कर्मचारी दलों का आरोप- नगर निगम में हो रहा करोड़ों का घोटाला
मेयर को मामले की नहीं जानकारी, कमिश्नर बोले- करेंगे मामले की जांच
जितेंद्र शर्मा।
पठानकोट।
नगर निगम के कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से लगाए जा रहे पीएफ घोटाले के आरोपों से नगर निगम घिर चुका है। निगम के मेयर के पास इसका जवाब नहीं है तो वह निगम कमिश्नर अकाउंट ब्रांच से जानकारी लेकर जांच करने की बात कह रहे हैं।
निगम के अकाउंटेंट राजन का कहना है कि नगर निगम मुलाजिमों का पीएफ जमा करता है, लेकिन कभी फंड की कमी आने पर कर्मचारियों का प्रोविडेंट फंड खर्च कर दिया जाता है। बाद में यही फंड निगम दोबारा पीएफ में जमा कर देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि कर्मचारियों को जानकारी दिए बिना निगम उनके हक का पीएफ कैसे प्रयोग कर सकता है। चिंता का विषय यह है कि इस बात की जानकारी निगम के मेयर और कमिश्नर जैसे उच्चाधिकारियों को नहीं है।
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निगम की ओर से नगर निगम के सफाई, वाटर सप्लाई समेत कई ब्रांचों के कर्मचारियों का हर माह वेतन में से पीएफ काटा जाता है। कर्मचारी शुरू से यही आरोप लगाते रहे हैं कि निगम उनके पीएफ के साथ घोटाला कर रहा है। बीते दिनों निगम के साथ कर्मचारी दलों के हुई सभी बैठकों में दलों ने निगम पर पीएफ घोटाले के आरोप लगाए हैं। अब कर्मचारी दल इस मुद्दे को लेकर 20 फरवरी को निगम के साथ बैठक करने वाले हैं। कर्मचारी इस बात का अंदेशा पहले ही जता चुके हैं कि निगम उनके पीएफ को खर्च कर रहा है। अब इस बात की पुष्टि निगम के अकाउंटेंट की ओर से कर दी गई है।

‘हर माह पीएफ काटता है निगम, दूसरी जानकारी नहीं’
अखिल भारतीय सफाई मजदूर यूनियन और स्वच्छ भारत सफाई मजदूर यूनियन की ओर से बीते कुछ समय से निगम पर पीएफ घोटाले के आरोप लगाए जा रहे हैं। कर्मचारी दलों के प्रतिनिधियों में रमेश कट्टो, दीपक भट्टी, रमेश दरोगा और जतिंदर चीना का कहना है कि निगम हर माह पीएफ काट लेता है, लेकिन न तो पीएफ नंबर और न ही कोई अन्य जानकारी कर्मचारियों को निगम की ओर से दी गई है। न तो कोई कर्मचारी अपने पीएफ खाते की जमा राशि खुद चेक कर सकता है और न ही अपनी मर्जी से पीएफ निकाल सकता है। पीएफ से राशि निकालने के लिए निगम को आवेदन देना पड़ता है, लेकिन निगम पीएफ देने में आनाकानी करता है।

पीएफ का कोई घोटाला नहीं : मेयर
मेयर अनिल वासुदेवा का कहना है कि पीएफ का कोई घोटाला नहीं है। हालांकि पीएफ प्रबंधन में गड़बड़ी होने का अंदेशा है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। क्योंकि अकाउंट ब्रांच का काम कमिश्नर के अधीन आता है। उन्होंने कमिश्नर को मामले की जांच करने के लिए कहा है। नगर निगम कमिश्नर कुलवंत सिंह ने कहा कि उन्हें भी इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। वह इसकी सारी जानकारी अकाउंटेंट से लेकर पड़ताल जरूर करेंगे।
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फंड की कमी आने पर खर्चे जाते हैं पीएफ से पैसे : राजन
नगर निगम के अकाउंट ब्रांच में अकाउंटेंट राजन ने बताया कि निगम में फंड की कमी आने पर कर्मचारियों के पीएफ से पैसे खर्च किए जाते हैं। हालांकि बाद में यह पैसे पूरे कर दिए जाते हैं। कर्मचारियों को कोई डिटेल न देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पीएफ के पैसे निगम के खाते से ही जमा होते हैं। निगम में आकर कर्मचारी इसकी जानकारी ले सकते हैं।


फोटो -1- मेयर अनिल वासुदेवा।
फोटो -1ए- नगर निगम कमिश्नर कुलवंत सिंह।
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