स्कूलों में जश्न, श्री दरबार साहिब में श्रद्धालुओं ने किया पवित्र सरोवर में स्नान
बसंत के दिन खिली धूप, पीले रंग की उड़ी पतंगें
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
बसंत के दिन ही खिली धूप ने यह अहसास दिला दिया है कि बसंत से दिन बड़े होने लगते हैं और सर्दी कम होने लगती है। बसंत के दिन पीले कपड़ों में जहां लोग दिखे वहीं आसमां पर पीले रंग की पतंगें खूब उड़ी। अमृतसर के छेहरटा साहिब गुरूद्वारा में बसंत पंचमी पर जहां पतंगबाजी की गई वहीं श्री दरबार साहिब में बसंत पंचमी के दिन लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। बसंत पंचमी को लेकर कई स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए तो वहीं बच्चों ने गिद्धा-भंगड़ा व बसंत बहार को लेकर लोकगीत गाए।
शहर के कई स्कूलों में बसंत का त्योहार मनाया गया। मूंगफली गच्चक बाटें गए। अमृतसर के जगत ज्योति स्कूल में बसंत का पर्व धूमधाम से मनाया गया। स्कूल की बेटियों ने पतंगबाजी जमकर की। विश्व रिकार्ड धारी पंतगबाज जगमोहन कन्नौजिया कहते हैं कि ड्रेगन डोर ने बसंत के दिन पतंगबाजी के शौक को खत्म ही कर दिया है। अब तो बस एक औपचारिकता ही बची है।
आजादी के पहले बसंत पर लाहौर में लगता था मेला
इतिहासकार सुरेंद्र कोछड़ बताते हैं कि बसंत पंचमी के दिन आजादी के पहले लाहौर में पतंगबाजी का मेला लगता था। जिसे देखने के लिए हजारों लोग पहुंचते थे। दोनों देशों के बंटवारे के बाद भी बसंत पर लाहौर में पतंग मेला लगता रहा है। इस दिन भारत के लोग यही प्रार्थना करते थे कि हवा का रुख भारत के तरफ हो जबकि लोहड़ी के दिन पाक के पतंगबाजों की यही दुआ रहती थी कि हवा पाकिस्तान के तरफ हो।
एक -दूसरे देशों में कटकर आती थी पतंगे
80 के दशक में लाहौर के लिए रोजाना ट्रेन अमृतसर से चला करती थी। पाक पतंगबाज बरेली की डोर के मुरीद हुआ करते थे। सौगात के तौर पर भारतीय डोर पाक जाया करती थी। लेकिन पिछले कुछ सालों से चाइनीज डोर ने भारत ही नहीं पाक के बाजारों पर भी कब्जा कर लिया है। पहले लोहड़ी व बसंत के दिन पतंगे एक-दूसरे देशों में कट कर आया करती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से ड्रेगन डोर ने पतंगबाजी का मजा किरकिरा कर दिया है। पतंगबाजी अब जानलेवा शौक ड्रेगन डोर ने कर दी है।