मन को मिली दिलासा कि बेटा जिंदा है
- तीन साल पहले नौकरी के लिए मोसुल गया था गांव तलवंडी झूरां का धरमिंदर
- कहा, आतंकियों से बचकर लौटे हरजीत ने मौत की कहानी गढ़ किया था भ्रमित
- विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयासों को सराहा
आर.रघुवंशी
बटाला ।
इराक के मोसुल शहर की जेल में 39 भारतीयों के होने को लेकर विदेश मंत्री सुसमा स्वराज की ओर से संभावना जताने के बाद इनसे जुड़े परिजनों को एक बार फिर उम्मीद की किरण नजर आई है। उन्हीं में से एक गांव तलवंडी झूरां निवासी धरमिंदर कुमार के परिजन भी हैं। विदेश मंत्री के बयान से उत्साहित धरमिंदर का परिवार चाहता है कि सरकार संभावनाओं की हकीकत का खुलासा जल्द से जल्द करे। उनके मुताबिक धरमिंदर तीन साल पहले नौकरी के सिलसिले में मोसुल (इराक)गया था। अब उसकी बहन तीन वर्षों से भाई को राखी बांधने के लिए तरस रही है। वहीं मां का कहना है कि विदेश मंत्री की बात से उनके मन को दिलासा मिली है कि उनका बेटा जिंदा है। कहा कि आतंकियों से बचकर लौटे हरजीत मसीह ने मौत की कहानी बयांकर उन्हें भ्रमित किया था।
धरमिंदर कुमार के परिजनों में लंबे समय बाद खुशी लौटी है। धरमिंदर कुमार को तीन साल पहले मोसुल में बंधक बना लिया गया था। सोमवार को धरमिंदर की मां कंवलजीत ने बताया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस खुलासे से उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कंवलजीत ने बताया कि उनको भी विदेश मंत्री ने दिल्ली बुलाया था, मगर कुछ घरेलू मजबूरियों के चलते वह दिल्ली नहीं जा सके। कंवलजीत कौर ने यह भी बताया कि विदेश मंत्री की बात से कम से उन्हें यह दिलासा तो मिली है कि उसका बेटा जिंदा तो है। उसके लिए यहीं बहुत बड़ा बात है।
कंवलजीत कौर ने बताया कि पिछले कुुछ साल पहले इराक से छूट कर आए गांव काला अफगाना के रहने वाले हरजीत मसीह ने बटाला पहुंच कर यह बात फैला दी थी कि इराक में सभी बंधक भारतीयों को गोली मार दी गई है। सिर्फ वहीं जान बचाकर जहां पहुंच पाया है। उसी दिन से वह भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि उसका बेटा जिंदा हो। कहा कि उसका बेटा जिस दिन घर आएगा, वह दिन उसके लिए दिवाली से कम नहीं होगा।
तीन वर्षों से भाई को राखी बांधने के लिए तरस रही बहन
धरमिंदर की बहन डिंपलजीत का कहना है कि वह अपने भाई की वापसी की आश में घर में रंग रोगन, साफ-सफाई कर रही है। सरकार से मांग करते हुए डिंपलजीत ने कहा कि सरकार रक्षाबंधन के पर्व तक भाई धरमिंदर को इराक से लेने की व्यवस्था हर हाल में कर दे, ताकि पिछले तीन वर्षों का इंतजार पूरा हो सके।
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कैप्शन- बटाला के गांव तलवंडी झूंरां में धरमिंदर कुमार की मां और बहन बातचीत करती हुई।
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कैप्शन- धरमिंदर कुमार की फाइल फोटो।