फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब की तरफ से कुश्ती लड़ेगा पठानकोट का सोनू

विज्ञापन
विज्ञापन
सभी केंद्र
विज्ञापन


पंजाब की तरफ से कुश्ती लड़ेगा पठानकोट का सोनू
हैदराबाद में नेशनल अंडर 17 में दम दिखाएगा गांव घोह का पहलवान
नौंवी कक्षा का छात्र सोनू का सपना ओलंपिक में मेडल जीतना
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट।
जिले के गांव घोह निवासी 17 वर्षीय सोनू कुश्ती में अब पूरे पंजाब की तरफ से नेशनल लेवल पर खेलेगा। आगामी समय में होने वाली नेशनल अंडर 17 कुश्ती प्रतियोगिता में सोनू पंजाब राज्य का प्रतिनिधित्व करेगा। बकौल सोनू यह उसके लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन फिर भी अभी काफी आगे जाने की उसकी तमन्ना है।
चार वर्ष की आयु से कुश्ती खेल रहा सोनू स्कूल और जिला स्तर पर कई मेडल जीत चुका है। अपने स्कूल में भी विशेष सम्मान समारोह में सोनू प्रिंसिपल जोगिंद्र कुमार से सम्मान पा चुका है। लेकिन अब सोनू को नेशनल लेवल पर खेलने का मौका मिला है। सोनू के लिए यह बड़ी उपलब्धि है, हैदराबाद में होने वाली इस नेशनल प्रतियोगिता के लिए सोनू ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। सोनू के मुताबिक वह इस सुनहरी मौके को किसी भी हाल में न गंवाते हुए जीतना चाहता है।
विज्ञापन

गांव घोह का निवासी सोनू गांव के ही सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में नौंवी का छात्र है। सोनू चार वर्ष का था तब से कुश्ती खेल रहा है। स्कूल और जिला स्तर पर वह कई मेडल भी जीत चुका है। हाल ही में जालंधर में हुई प्रतियोगिता में सोनू ने गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ अपने स्कूल बल्कि पूरे पठानकोट का नाम रोशन किया है। इसके लिए सोनू को स्कूल में ही विशेष सम्मान समारोह के तहत सम्मानित किया जा चुका है।
सोनू के पिता बिल्लू खुद भी पहलवान हैं। इसके अलावा वह डेयरी व्यवसाय करके घर चलाते हैं। सोनू की माता मानों गृहिणी हैं। सोनू के अनुसार उसके माता पिता ने शुरू से ही उसे खेलों में आगे जाने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा सोनू के स्कूल प्रिंसिपल जोगिंद्र कुमार और इंग्लिश के अध्यापक पुष्पिंद्र सिंह पठानिया आदि भी सोनू के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सोनू के अनुसार उक्त सभी लोगों की ओर से मिलने वाली प्रेरणा से ही वह आगे बढ़ पा रहा है।
सोनू ने बताया कि बचपन से ही उसे खेलों में रूचि थी और सौभाग्य की बात यह रही कि उसके माता पिता, शिक्षकों, कोच और यहां तक की दोस्तो नें भी खेलों में आगे जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि उनका सपना देश के लिए कुश्ती में ओलंपिक मेडल जीतना है । उन्होनें कहा कि देश की युवा पीढ़ी को खेलों में बढ़कर भाग लेना चाहिए और नशों जैसी बला से दूर रहना चाहिए।
विज्ञापन

पिता से मिली प्रेरणा
सोनू के अनुसार उसके लिए सबसे बड़े प्रेरणा के स्रोत उसके पिता हैं। सोनू के पिता पेशे से डेयरी व्यवसायी हैं, लेकिन वह खुद पहलवानी भी करते हैं। सोनू ने बताया कि उसके पिता सालों से सरकारी स्कूलों के बच्चों को कुश्ती की ट्रेनिंग दे रहे हैं। सोनू के पिता बिल्लू गांव चक्क माधोसिंह में रंझू पहलवान के अखाड़े में बच्चों को कुश्ती की ट्रेनिंग भी देते हैं। पिता को देखकर ही महज चार वर्ष की आयु में पहले सोनू ने कुश्ती की दुनिया में कदम रखा और आज सोनू सफलता की ओर लगातार बढ़ रहा है। पिता के अलावा सोनू के निजी कोच रूप लाल भी प्रेरणादायक हैं।


फोटो-01, जानकारी देता हुआ मेडल के साथ सोनू पहलवान
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें