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मैं धर्म प्रचार के लिए हाजिर हूं: लौंगोवाल
एसजीपीसी के नवनियुक्त अध्यक्ष ने किया श्री वाहेगुरु जी का शुकराना, बादल परिवार का शुक्रिया
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
मैं धर्म प्रचार के लिए हरवक्त गुरु के चरणों में हाजिर रहूंगा। जो विश्वास एसजीपीसी सदस्यों ने मुझ पर किया है, उसे पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाऊंगा। मुझे खुशी है कि वाहे गुरु ने मुझे यह सेवा सौंपी। मैं धन्यवाद करता हूं सरदार प्रकाश सिंह बादल व सरदार सुखबीर सिंह बादल को जिन्होंने शिरोमणि अकाली दल के तरफ से मुझ पर विश्वास किया। मैं सिख धर्म के प्रचार व प्रसार के लिए सदैव अग्रणी रहूंगा। यह कहते हुए एसजीपीसी के नए अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने मीडिया से यह भी कहा कि पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर किरपाल सिंह बडूंगर के साथ किसी की कोई नाराजगी नहीं है, बल्कि उनके नाम का प्रस्ताव खुद प्रोफेसर बडूंगर के विचारों के बाद ही रखा गया था। मुझे यह जानकारी मेरे नाम के प्रस्ताव के बाद मिली।
सोशल मीडिया में वोटिंग के पहले बन गए अध्यक्ष लौंगोवाल
एसजीपीसी अध्यक्ष चुनाव केवल औपचारिकता भर थी। वोटिंग हुई लेकिन बड़े अंतराल से लौंगोवाल जीते। हालांकि बाद में उनके खिलाफ मैदान में आए अमरीक सिंह शाहपुर को कार्यकारिणी में शामिल करके एसजीपीसी ने एक तीर से दो निशाने साधे। एसजीपीसी ने पूर्व सचिव सुखदेव सिंह भौर को राजनीतिक ढंग से करारी मात दे दी। खास बात थी कि लौंगोवाल के अध्यक्ष का चुनाव की वोटिंग करीब साढ़े तीन बजे हुई। जबकि सोशल मीडिया पर उनके अध्यक्ष बनने की खबरें दोपहर एक बजे से आनी शुरू हो गईं थीं।
एसजीपीसी के 42 वें अध्यक्ष बने लौंगोवाल
एसजीपीसी के 42वें अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल बने। रघुजीत सिंह करनाल सीनियर उप प्रधान बने। हरपाल सिंह जल्ला जूनियर उप प्रधान बने। जबकि सरदार गुरबचन सिंह करमूवाला सचिव चुने गए।
एसजीपीसी की नई कमेटी श्री दरबार साहिब में हुए नतमस्तक
एसजीपीसी की नई कमेटी ने श्री दरबार साहिब में नतमस्तक होकर अरदास की। इसके पहले तेजा सिंह समुंदरी हाल में एसजीपीसी के सालाना इजलास के दौरान केसगढ़ के जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने अरदास की। पावन हुक्मनामा ज्ञानी हरमित्र सिंह ने लिया। श्री दरबार साहिब के मुख्य ग्रंथी सिंह साहिब ज्ञानी जगतार सिंह, श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, पूर्व अध्यक्ष किरपाल सिंह बंडूगर, पूर्व सचिव सिंह, केसगढ़ साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी मल्ल सिंह, मार्शल अर्जुन सिंह, सुखबीर सिंह सुल्तानविंड, सरदार जोगिंदर सिंह साहनी, भाई मंजीत सिंह, जसवंत सिंह पडैल, कुलदीप सिंह नसूपुर, महिंदर सिंह हुसैनपुर, जत्थेदार तोता सिंह, बीबी जगीर कौर, जत्थेदार अवतार सिंह मकक़्ड़, अवतार सिंह चावला, जत्थेदार दयाल सिंह, सुरजीत सिंह भिटेटवड, बीबी किरणजीत कौर, सरदार बलदेव सिंह कायमपुर, बाबा बूटा सिंह, सरदार केवल सिंह बादल, संत बलबीर सिंह घुन्नस, भाई राजिंदर सिंह मेहता, बीबी हरजिंदर कौर चंडीगढ़, भाई राम सिंह, भाई गुरचरण सिंह ग्रेवाल, भाई मंजीत सिंह, सरदार गुरिंदर पाल सिंह गोरा, सरदार गुरिंदर पाल सिंह लाली राणिके, जोध सिंह समरा, बलजीत सिंह जलालउस्मा, डा. रूप सिंह, अवतार सिंह, मंजीत सिंह, हरभजन सिंह मनावां, महिंदर सिंह अहरी, सुखदेव सिंह, वीजे सिंह, दलजीत सिंह बेदी, बलविंदर सिंह व अन्य मौजूद थे।