भारत में 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शहीद हुए 282 भारतीय सैनिकों को आखिरकार 157 साल बाद आजादी नसीब हो सकेगी।
तहसील अजनाला के एक कुएं में दफन इन शहीदों की अस्थियों को बाहर निकालकर पूरे कर्मकांड के साथ उनका अंतिम संस्कार करने का फैसला किया गया है।
अस्थियों को बाहर निकालने की काम 28 फरवरी से शुरू किया जाएगा। गुरुद्वारा शहीद गंज प्रबंधक कमेटी के सदस्यों ने इन शहीदों की अस्थियों को कुएं से निकालने का निर्णय लिया है।
इस मामले में कमेटी को जिला प्रशासन से अनुमति मिल गई है। मुगलई ईंटों से बने इस कुएं में 11.5 फीट नीचे शहीदों की अस्थियां होने की पृष्टि कर ली गई है।
गुरुद्वारा शहीद गंज प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अमरजीत सिंह सरकारिया, महासचिव काबल सिंह शाहपुर और कोषाध्यक्ष हरभजन सिंह नेपाल ने बताया कि देश की सामाजिक, धार्मिक व राजनीतिक संस्थाओं की उपस्थिति में 28 फरवरी से शहीदों की अस्थियों को कुएं से निकालने का काम शुरू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अजनाला में ही शहीदों की अस्थियों का अंतिम संस्कार करने के बाद उनके फूलों को श्री गोइंदवाल साहिब और हरिद्वार ले जाकर गंगा में प्रवाहित कर दिया जाएगा।
शहीद स्मारक के निर्माण की मांग
गुरुद्वारा शहीद गंज प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अमरजीत सिंह सरकारिया ने पंजाब सरकार से मांग की है कि शहीदों के अंतिम संस्कार के लिए अजनाला में तुरंत उचित जगह उपलब्ध कराई जाए और साथ ही अजनाला में शहीदों की याद में स्मारक का निर्माण कराया जाए।