करीब 21 दिन पहले जब उसकी शादी थी, बाराती और रिश्तेदार आ चुके थे, वह खुशी और सपनों की दुनिया में खोई सजने संवरने के लिए ब्यूटी सैलून गई थी।
उस समय उसके पास था डेढ़ लाख रुपये का लहंगा, जिसे उसने शादी के लिए पहनना था। उस अभागी के साथ वहां जो कुछ उस घटना ने उसे ससुराल की दहलीज भी छूने नहीं दी और 20 दिन अस्पताल में तड़पने के बाद शनिवार को चिता पर लाकर लिटा दिया।
लुधियाना में तेजाब कांड की पीड़िता हरप्रीत को शनिवार को उसके परिजनों और पूरे शहर ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। हरप्रीत का शुक्रवार सुबह मुंबई के नेशनल बर्न केयर सेंटर में निधन हो गया था। शनिवार को हरप्रीत का शव जैसे ही बरनाला पहुंचा, उसे देखकरक शायद ही कोई आंख थी, जो न रोई हो। रोते हुए परिजनों और इलाके के लोगों ने हरप्रीत का अंतिम संस्कार कर दिया।
शनिवार सुबह शव पहुंचते ही इलाके के लोग हरप्रीत के घर इकट्ठा होने लगे थे। राम बाग बरनाला में दोपहर तीन बजे हरप्रीत का अंतिम संस्कार किया गया। संस्कार के दौरान बरनाला के डिप्टी कमिश्नर गुरलवलीन सिंह सिधू भी भावुक हो उठे और उनकी आंखों में भी आंसू आ गए।
मर गई ससुरालियों की इंसानियत
हरप्रीत मुंबई में जब तक जिंदा रही, वह होश आने पर बार-बार अपने होने वाले पति हनी के बारे में पूछती थी। लेकिन हनी और उसका परिवार इंसानियत के नाते भी अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुआ।
परिजनों ने बताया कि तेजाब कांड होने के बाद से ही हनी और उसके घरवालों ने हरप्रीत से बात करना बंद कर दिया था। हरप्रीत के भाई अर्शदीप सिंह ने बताया कि बेशक उसकी बहन आंखों की रोशनी खो चुकी थी, लेकिन वह हर समय अपने मंगेतर से मिलने की इच्छा जताती थी।
कभी-कभी दर्द से कराहते हुए हरप्रीत कौर अपने भाई से गुहार लगाती थी कि हनी से बात करा दे तो उसे कुछ चैन मिल जाएगा।
अर्शदीप ने बताया कि जब वह हनी को फोन मिलाता तो उसका यही जवाब होता के बार-बार मुझे फोन करके परेशान मत करो। जब हरप्रीत कौर ठीक हो जाएगी और उसकी प्लास्टिक सर्जरी हो जाएगी तब वह बात करेगा, लेकिन दुखी बहन का दुखी भाई यह बात अपनी बहन को नहीं बता पाया कि उसका मंगेतर उसके साथ बात नहीं करना चाहता है। को दिलासा देते हुए।