ग्रामीण विकास के लिए ठेके पर दी जाने वाली जमीन तो ग्रेटर मोहाली विकास प्राधिकरण (गमाडा) ने अधिग्रहण कर ली लेकिन अभी तक करोड़ों रुपये नहीं दिए हैं।
पंचायत मंत्री के दखल के बावजूद पंचायतों का अभी तक 65 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा अटका है। पंचायत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गमाडा ने तो इससे अरबों बना लिए लेकिन पंचायतों का पैसा बहानेबाजी के चलते रोका जा रहा है।
जानकारी के अनुसार अजीतगढ़ गांवों की करीब पांच सौ बीघा जमीन का गमाडा ने अधिग्रहण किया है। यह जमीन कामर्शियल और रिहायशी कार्यों के लिए अधिग्रहीत की गई है।
इसमें से विभिन्न कारणों के चलते पंचायतों को अभी तक 65 करोड़ रुपये से ज्यादा की पेमेंट नहीं हुई है। इस पैसे में से 40 करोड़ रुपये उस जमीन का है जिस का पैसा खजाने में जमा करवा दिया है, परंतु पंचायतों तक नहीं पहुंचा है।
खजाने में से पैसा राज्य सरकार अपने कार्यों के लिए इस्तेमाल कर रही है। 25 करोड़ रुपये के करीब पैसा ऐसा है जो अभी तक खजाने में भी जमा नहीं करवाया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बहुत सा पैसा ऐसा है कि गमाडा ने खुद ही किसी न किसी व्यक्ति से एक शिकायत लेकर मामले को विवादित दिखा दिया है।
इन करोड़ों रुपयों को बैंकों में रखकर अधिकारी दोस्ती पाल रहे हैं। जबकि कानून के मुताबिक यदि पैसा लेट होता है तो यह 12 फीसदी और ज्यादा देरी होने से इस से भी ज्यादा ब्याज दर के साथ वापस लौटाना होता है।
पंचायत मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा ने 29 सितंबर को गमाडा के मुख्य प्रशासक को पत्र लिख कर पूरे केसों की जानकारी मांगी थी जो अभी तक पूरी उपलब्ध नहीं करवाई गई है।
पंचायत विभाग इस बात से खफा है कि पंचायतों की आमदन का श्रोत भी खत्म हो गया और उनकी जमीन का पैसा भी नहीं मिला है।
इन गांवों की है जमीन
बाकरपुर, चाचू माजरा, रायपुर खुरद, झिऊर हेड़ी, मौली वैदवान, नारायणगढ़, मनौली, छत्त। इनकी करीब 325 बीघे जमीन है जिसका पैसा खजाने में पड़ा है पंचायतों को नहीं मिला।
यह करीब 40 करोड़ बनता है। सबसे ज्यादा पैसा करीब 19 करोड़ रुपये चाचू माजरा का है।
इसके अलावा जिनका पैसा खजाने में भी जमा नहीं करवाया गया है, उनमें फिरोजपुर बंगर, सुनेडा, सुखगड़, पापड़ी, देवीनगर, मुल्लांपुर, संभालकी, मौली वैदवान, पत्ती सोहाणा, चौ माजरा, सैणि माजरा आदि हैं।
गमाडा ने बहुत से गांवों की पेमेंट कर दी है। बचे लोगों की भी पेमेंट कर दी जाएगी। कई मामले विवादित होने के कारण अदालतों में हैं। सभी का पैसा देने का प्रयास हो रहा है।
एके सिन्हा, मुख्य प्रशासक, गमाडा