रूस-यूक्रेन के बीच जंग शुरू हुए 100 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं। इस युद्ध में यूक्रेन के 30 हजार से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है। एक लाख से ज्यादा लोग घायल हैं। इस युद्ध का असर सिर्फ रूस और यूक्रेन पर ही नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
रूस-यूक्रेन के बीच जंग शुरू हुए 100 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं। इस युद्ध में यूक्रेन के 30 हजार से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है। एक लाख से ज्यादा लोग घायल हैं। इस युद्ध का असर सिर्फ रूस और यूक्रेन पर ही नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
आइए जाते हैं कि 100 दिन बाद अब इस युद्ध में आगे क्या हो सकता है? क्या युद्ध खत्म हो जाएगा या फिर अभी लंबा संघर्ष जारी रहेगा?
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कीव में रूस का हमला
- फोटो : twitter/KyivPost
रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक क्या-क्या हुआ?
23 फरवरी 2022 की रात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन का एलान किया। पुतिन ने अपने सैनिकों और वायुसेना के जवानों को यूक्रेन पर हमला करने का आदेश दे दिया। इसके चंद घंटे बाद यानी 24 फरवरी की तड़के सुबह यूक्रेन की राजधानी कीव और आसपास के शहरों में हवाई हमले होने लगे। रूस के इस हमले से पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया।
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रूस-यूक्रेन युद्ध
- फोटो : अमर उजाला
यूक्रेन के इन शहरों पर रूस का कब्जा
रूस अब तक यूक्रेन के मैरियूपोल, सेवेरोदोनेत्स्क, डोनबास, लुहान्स्क, मेलिटोपोल, आइजम, लीमन, डोनेस्क जैसे शहरों पर कब्जा कर चुका है। अब रूसी सैनिक नॉर्थ यूक्रेन की तरफ बढ़ रहे हैं। जो शहर पूरी तरह से रूस के कब्जे में आ चुके हैं, उन्हें वापस पाने के लिए यूक्रेन ने पूरी ताकत झोंक रहा है।
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रूस-यूक्रेन युद्ध
- फोटो : अमर उजाला
कितने लोग मारे गए?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में अब तक 30 हजार से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है। इनमें 21 हजार से ज्यादा लोगों ने मैरियूपोल में जान गंवाई। यूक्रेन का दावा है कि इस युद्ध में रूस के 30 हजार से ज्यादा सैनिक भी मारे गए हैं, 40 हजार से ज्यादा रूसी सैनिकों को पकड़ लिया गया है। हालांकि, रूस ने मार्च में आंकड़ा जारी करके बताया था कि उसके 1351 जवान शहीद हुए हैं, जबकि 3825 जवानों को यूक्रेन ने बंधक बना रखा है। इसके बाद रूस की तरफ से कोई नया आंकड़ा जारी नहीं किया गया। यूक्रेनी सैनिकों की बात करें तो दो दिन पहले ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा था कि उनके 60 से 100 सैनिक रोजाना शहीद हो रहे हैं। 500 से अधिक जवानों को रूसी सैनिकों ने बंधक बना रखा है। इस तरह अब तक यूक्रेन के 15 हजार से ज्यादा जवान मारे जा चुके हैं।
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युद्ध में कितना नुकसान हुआ?
यूक्रेन के पार्लियामेंट्री कमिशन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को बताया है कि अब तक इस युद्ध में रूस ने 38 हजार से ज्यादा आवासीय इमारतों को ध्वस्त कर दिया है। 2.20 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं। 1900 से ज्यादा शिक्षण संस्थान बर्बाद हो चुके हैं। इनमें 180 पूरी तरह से धराशायी हो चुके हैं। इनके अलावा 300 से ज्यादा कारें, 50 रेल ब्रिज, 500 फैक्टरी और 500 से ज्यादा अस्पताल क्षतिग्रस्त हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि इस युद्ध में यूक्रेन के 296 अस्पतालों, एंबुलेंस और स्वास्थ्यकर्मियों को निशाना बनाया गया है।
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दुनिया पर क्या असर पड़ा ?
दुनिया पर इस युद्ध का सबसे बड़ा असर खाद्य संकट के रूप में उभरकर सामने आया है। रूस और यूक्रेन दोनों ही गेंहू के बड़े उत्पादक और निर्यातक देश हैं। दुनिया का 10 प्रतिशत गेंहू यूक्रेन से निर्यात होता है। इसके अलावा मक्का के वैश्विक व्यापार में भी यूक्रेन की हिस्सेदारी 15 फीसदी है। दुनिया में इस्तेमाल होने वाले सूरजमुखी के तेल का 50 प्रतिशत उत्पादन यूक्रेन में ही होता है। युद्ध के कारण दुनिया में गेहूं और सूरजमुखी तेल का संकट आ गया है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य आपूर्ति कार्यक्रम बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।
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ऊर्जा उत्पादन पर भी पड़ा असर
इस युद्ध की वजह से सिर्फ खाद्य संकट ही सामने नहीं आया, बल्कि ऊर्जा उत्पादन पर भी असर पड़ा है। रूस दुनिया भर में प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। वह कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और तीसरा सबसे बड़ा कोयला निर्यातक देश है। युद्ध से पहले तीन चौथाई रूसी गैसें और आधा रूसी कच्चा तेल यूरोप भेजा जाता था। यूरोपीय संघ का एक चौथाई तेल, गैस और कोयला उपयोग रूस से पूरा होता था। युद्ध के चलते इस पर काफी असर पड़ा है।
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रूस के राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की
- फोटो : अमर उजाला
अब आगे क्या हो सकता है?
रूस-यूक्रेन दोनों ही पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसे में 100 दिन से लगातार युद्ध जारी है। इसका असर दुनिया के लगभग सभी देशों पर पड़ रहा है। लोगों की आम जिंदगी प्रभावित होने लगी है। हर जगह महंगाई बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में हमने विदेश और रक्षा मामलों के जानकारों से बात की। उनसे पूछा कि अब इस युद्ध में आगे क्या-क्या संभावनाएं दिख रही हैं। उन्होंने अलग-अलग बिंदुओं में युद्ध की संभावनाओं के बारे में बताया।
पढ़िए विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल और रक्षा विशेषज्ञ कर्नल जेपीएस मेहता ने क्या कहा?
1. लंबे समय तक जारी रह सकता है युद्ध
रक्षा विशेषज्ञ कर्नल जेपीएस मेहता कहते हैं, 'रूस और यूक्रेन दोनों ने साफ कर दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे। ऐसे में लड़ाई लंबे समय तक जारी रहने की आशंका है। यूक्रेन को पश्चिमी देशों की तरफ से मदद मिल रही है, इससे वह काफी मजबूती से रूस को टक्कर दे रहा है। रूस रणनीतिक तौर पर आगे बढ़ रहा है। धीरे-धीरे यूक्रेन के शहरों को अपने कब्जे में ले रहा है और हर उस रास्ते को बंद करने की कोशिश कर रहा है, जहां से यूक्रेन को मदद मिल रही है।'
कर्नल मेहता के अनुसार, 'ऐसा करने पश्चिमी देशों पर भी दबाव बढ़ेगा और वह यूक्रेन को मदद करना छोड़ अपने आर्थिक हालात को सुधारने पर फोकस करेंगे। साथ ही, चीन से संभावित खतरों से निपटने के लिए तैयारी करेंगे। हालांकि, इसकी संभावना कम है। क्योंकि पश्चिमी देशों ने पहले ही यूक्रेन की हर हालत में मदद का एलान किया है। ऐसे समय पीछे हटने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका मजाक बनेगा।' उन्होंने आगे कहा, 'युद्ध में अगर रूस कभी कमजोर पड़ा तो वह न्यूक्लियर हमला भी कर सकता है। राष्ट्रपति पुतिन कई बार इसकी धमकी भी दे चुके हैं। अगर ऐसा होता है तो तृतीय विश्व युद्ध भी हो सकता है।'
2. रूस की तरफ से युद्धविराम की घोषणा
विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल कहते हैं, 'संभव है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्धविराम का एलान करके पूरी दुनिया को चौंका दें। यूक्रेन के कई बड़े शहर अब रूस के कब्जे में आ चुके हैं। ऐसे में वह दावा भी कर सकते हैं कि रूस का सैन्य-अभियान अब पूरा हो गया है।'
आदित्य आगे कहते हैं, 'ऐसी स्थिति में रूस उन इलाकों से अपना अधिकार क्षेत्र हटा सकता है, जहां उसके समर्थक नहीं है। हालांकि, डोनबास जैसे इलाकों को क्रीमिया की तरह अलग करवा सकता है। लेकिन इस शर्त पर यूक्रेन युद्ध विराम कर दे, ऐसी भी संभावना बनती नहीं दिखाई दे रही है। अमेरिका, ब्रिटेन और पूर्वी यूरोप के अधिकांश क्षेत्र इसका विरोध करेंगे। मतलब इस स्थिति में भी युद्ध जारी रह सकता है।'
3. पूरे यूक्रेन पर रूस का कब्जा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन घुटनों पर आ जाए। यूक्रेन के राष्ट्रपति हार मान लें। इसके लिए रूस को यूक्रेन के सभी शहरों पर कब्जा करना होगा। ऐसा करने के बाद यह युद्ध रणनीतिक तौर पर रूस जीत सकता है। हालांकि, ऐसा करने पर रूस को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। रूस की जीडीपी पहले ही काफी गिर चुकी है। कई देशों ने रूस से व्यापारिक संबंध तोड़ दिए हैं। इसका असर रूस की आम जनता पर पड़ेगा।