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म्यांमार हिंसा: आपको भी झंकझोर देगी रोहिंग्या मुसलमानों की दर्दनाक दास्तां

Sun, 03 Sep 2017 12:21 PM IST
amarujala.com- Presented By: त्रिनाथ त्रिपाठी
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रोहिंग्या मुसलमान
म्यांमार में इन दिनों भयंकर हिंसा भड़क उठी है। रोहिंग्या मुसलमान और सुरक्षाबलों के बीच हुए संघर्ष में अब तक लगभग 400 लोग मारे गए हैं। हिंसा के चलते म्यांमार में हालात ऐसे हैं कि स्थानीय रोहिंग्या मुस्लिम मजबूरन भागकर बांग्लादेश पहुंच रहे हैं।
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आपको भी झंकझोर देगी रोहिंग्या मुसलमानों की दर्दनाक दास्तां

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रोहिंग्या मुसलमान
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को म्यांमार के राजदूत से इस मामले पर गहरी चिंता जताई है। बांग्लादेश ने कहा कि परेशान लोग सीमा पार कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में यहां आ रहे हैं।
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रोहिंग्या मुसलमान
बांग्लादेश ने कहा कि सीमा पर अनुशासन का पालन होना चाहिए। बांग्लादेश अथॉरिटी की तरफ से सीमा पार करने वालों को फिर से म्यांमार वापस भेजा जा रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसकी कड़ी निंदा की है और कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।

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रोहिंग्या मुसलमान
बांग्लादेश रोहिंग्या मुसलमानों को शरणार्थी के रूप में स्वीकार नहीं कर रहा है। रोहिंग्या और शरण चाहने वाले लोग 1970 के दशक से ही म्यांमार से बांग्लादेश आ रहे हैं
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रोहिंग्या मुसलमान
आपको बता दें कि इस हफ्ते की शुरुआत में ह्यूमन राइट्स वॉच ने एक सैटलाइट तस्वीर जारी की थी। इसमें बताया गया था कि पिछले 6 हफ्तों में रोहिंग्या मुसलमानों के 1,200 घरों को तोड़ दिया गया।
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रोहिंग्या मुसलमान
मानवाधिकार समूह ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि म्यांमार से मिली नई सैटेलाइट तस्वीरों से साफ़ पता चलता है कि रोहिंग्या मुसलमानों के एक गांव में 700 से अधिक घर जलाकर तबाह कर दिए गए हैं। समूह का कहना है कि ताज़ा तस्वीरें उत्तरी रखाइन प्रांत में तबाही के बारे में गंभीरता से सोचने पर विवश करती हैं।
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रोहिंग्या मुसलमान
म्यांमार में इन दिनों भयंकर हिंसा भड़क उठी है। रोहिंग्या मुसलमान और सुरक्षाबलों के बीच हुए संघर्ष में अब तक लगभग 400 लोग मारे गए हैं। हिंसा के चलते म्यांमार में हालात ऐसे हैं कि स्थानीय रोहिंग्या मुस्लिम मजबूरन भागकर बांग्लादेश पहुंच रहे है।

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रोहिंग्या मुसलमान
म्यांमार में इन दिनों भयंकर हिंसा भड़क उठी है। रोहिंग्या मुसलमान और सुरक्षाबलों के बीच हुए संघर्ष में अब तक लगभग 400 लोग मारे गए हैं। हिंसा के चलते म्यांमार में हालात ऐसे हैं कि स्थानीय रोहिंग्या मुस्लिम मजबूरन भागकर बांग्लादेश पहुंच रहे है।

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रोहिंग्या मुसलमान
बांग्लादेश में मौजूद संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी की एक वरिष्ठ अधिकारी विवियन टेन का कहना है, ''यहां पर इस समय एक अनुमान के मुताबिक दस हज़ार ऐसे लोग हैं जो शरणार्थी शिविर में नए-नए आए हैं। सड़कों के किनारे कई अस्थायी तंबू नज़र आ रहे हैं। हर खाली जगह भरती जा रही है।'' 

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रोहिंग्या मुसलमान
विस्थापित हुए रोहिंग्या मुसलमानों का आरोप है कि सैनिक जान-बूझकर उनके ठिकानों में आग लगाते हैं। हालांकि म्यांमार की सरकार इस आरोप से इंकार करती है।

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रोहिंग्या मुसलमान
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आख़िर रोहिंग्या कौन हैं? इनसे म्यांमार को क्या दिक्क़त है? ये भागकर बांग्लादेश क्यों जा रहे हैं? इन्हें अब तक नागरिकता क्यों नहीं मिली? आंग सान सू ची दुनिया भर में मानवाधिकारों की चैंपियन के रूप में जानी जाती हैं और उनके रहते यह ज़ुल्म क्यों हो रहा है? 

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रोहिंग्या मुसलमान
ऐसा कहा जाता है कि दुनिया में रोहिंग्या मुसलमान ऐसा अल्पसंख्यक समुदाय है जिस पर सबसे ज़्यादा ज़ुल्म हो रहा है। आख़िर रोहिंग्या कौन हैं? इनसे म्यांमार को क्या दिक्क़त है? ये भागकर बांग्लादेश क्यों जा रहे हैं? इन्हें अब तक नागरिकता क्यों नहीं मिली? आंग सान सू ची दुनिया भर में मानवाधिकारों की चैंपियन के रूप में जानी जाती हैं और उनके रहते यह ज़ुल्म क्यों हो रहा है?

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रोहिंग्या मुसलमान
दरअसल म्यांमार की बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है। म्यांमार में एक अनुमान के मुताबिक़ 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं। इन मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं। सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। हालांकि ये म्यामांर में पीढ़ियों से रह रहे हैं। रखाइन स्टेट में 2012 से सांप्रदायिक हिंसा जारी है। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जानें गई हैं और एक लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।

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रोहिंग्या मुसलमान
बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान आज भी जर्जर कैंपो में रह रहे हैं। रोहिंग्या मुसलमानों को व्यापक पैमाने पर भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। लाखों की संख्या में बिना दस्तावेज़ वाले रोहिंग्या बांग्लादेश में रह रहे हैं। इन्होंने दशकों पहले म्यांमार छोड़ दिया था।

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रोहिंग्या मुसलमान
आपको बता दें कि म्यांमार में मौंगडोव सीमा पर 9 पुलिस अधिकारियों के मारे जाने के बाद पिछले महीने रखाइन स्टेट में सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया था। सरकार के कुछ अधिकारियों का दावा है कि ये हमला रोहिंग्या समुदाय के लोगों ने किया था। इसके बाद सुरक्षाबलों ने मौंगडोव ज़िला की सीमा को पूरी तरह से बंद कर दिया और एक व्यापक ऑपरेशन शुरू किया।
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रोहिंग्या मुसलमान
रोहिंग्या कार्यकर्ताओं का कहना है कि सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। म्यामांर के सैनिकों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के संगीन आरोप लग रहे हैं। सैनिकों पर प्रताड़ना, बलात्कार और हत्या के आरोप लग रहे हैं। हालांकि सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। कहा जा रहा है कि सैनिक रोहिंग्या मुसलमानों पर हमले में हेलिकॉप्टर का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
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