दक्षिण कोरिया के एक गांव में सुबह के साढ़े दस बजे हैं। सीमा पर बसे इस आखिरी गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है जिसे एक-आधा बख्तरबंद गाड़ियों कभी-कभार तोड़ देती हैं। योंगाम री गांव के बाद से ही उत्तर और दक्षिण के बीच का डिमिलिट्राइज्ड जोन (विसैन्यीकृत क्षेत्र) शुरू हो जाता है। अनुमान है कि इस जोन में दस लाख से भी ज्यादा लैंडमाइन्स का जाल बिछा हुआ है।
गांव के चेहरों पर आज भी दहशत
इधर गांव के ओल्ड-एज होम (वृद्धाश्रम) में करीब एक दर्जन महिलाएं खाना परोसे जाने के इंतजार में हैं। कई किस्म की सूखी मछलियां, पोर्क-चावल, किमची सलाद और कोरिया की 'राष्ट्रीय शराब' सोजू आज मेज पर है। ये वो लोग हैं जिन्होंने देश के हिंसक बंटवारे को देखा है और इनके चेहरों पर आज भी दहशत की छाप है। 90 साल की ली सुन जा ने 1950 में इसी गांव में लोगों का कत्ले-आम देखा था।