उत्तरी थाइलैंड की एक गुफा में फंसी युवा फुटबॉल टीम की लोकेशन सोमवार को पता लगा ली गई और 12 बच्चे और उनके फुटबॉल कोच को जिंदा पाया गया। लेकिन अभी ऑपरेशन पूरा नहीं हुआ है। दरअसल, बढ़ता पानी का स्तर और कीचड़ की वजह से बच्चों को बाहर लाना संभव नहीं है। गोताखोरों का कहना है कि अभी इन बच्चों को गुफा से बाहर निकालने में लगभग एक महीने का समय लग सकता है। इन बच्चों की उम्र 11 से 16 साल के बीच है और साथ में एक कोच है जो 25 साल का है।
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उत्तरी थाईलैंड में अपने कोच के साथ फुटबॉल के अभ्यास के लिए गए 12 बच्चे अचानक गायब हो गए। 9 दिन बाद यह सभी बच्चे बचाव दल को जीवित मिल गए हैं। यह सभी गुफाओं में घुसने के बाद गायब हो गए थे। इन्हें ढूंढने के लिए थाईलैंड की नौसेना और वायुसेना ने एक विशेष अभियान चलाया था। यह सभी 23 जून को लापता हुए थे।
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हालांकि ऑपरेशन अभी पूरा नहीं हुआ है। क्योंकि गुफा में पानी और कीचड़ के चलते बच्चों को निकालना संभव नहीं है। इसलिए इन्हें निकालने में अभी एक महीने का समय और लग सकता है।
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इनके मिलने के बाद थाईलैंड की नौसेना ने जीवित बच्चों का एक वीडियो भी जारी किया है। जिन गुफाओं में ये बच्चे घुमने गए थे वहां भारी बारिश होने के कारण गुफाओं में भी पानी घुस गया था। इस वजह से इनके बाहर निकलने के रास्ते बंद हो गए थे।
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सर्च अभियान के दौरान इनकी साकिलें गुफा के एंट्री गेट पर मिली थीं। जिसके बाद इनका पता चला और इन्हें गुफा से सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास कि गए। यह सभी 11 से 16 साल की उम्र के बच्चे हैं। जबकि इनके कोच की उम्र 25 साल है।
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सर्च अभियान में लगे लोगों को उम्मीद थी कि बाढ़ के पानी से घिरे इस दल को गुफा के भीतर कोई सुरक्षित ठिकाना मिल गया होगा। यह थाईलैंड की चौथी सबसे बड़ी गुफा है।
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थाईलैंड की नौसेना के गोताखोर, चार ब्रितानी गुफा गोताखोर और कुछ अमरीकी सैन्य दल के सदस्यों ने टैम लूंग नोन गुफा के सबसे भीतरी इलाकों में पहुंचने के लिए काफी मशक्कत की।
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इस दौरान गुफा से बाहर पानी निकालने के लिए बड़े-बड़े पंपों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि भारी बारिश के चलते काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यही नहीं इन्हें बचाने के लिए चट्टानों में सुराख करके पानी को बाहर निकाला गया।
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गुफा के अंदर एक रोबोट को भी भेजा गया। जिसने पानी की गहराई का पता लगाया। इसके बाद खोजी कुत्तों को भी लाया गया। धीरे-धीरे यह बात पूरी दुनिया में फैल गई। जिसके बाद लोगों ने इनके सुरक्षित बाहर आने की दुआएं कीं।
बात सार्वजनिक होने के बाद काफी लोग भी बच्चों की मदद करने वहां पहुंचे। बौद्ध भिक्षुओं ने भी गुफी के बाहर पूजा पाठ की। टैम लूंग गुफा के बाहर लोगों ने बच्चों के कुशलपूर्वक लौटने की दुआएं मांगीं। यही नहीं लोगों ने तंत्रमंत्र का भी इस्तेमाल किया और मुर्गे की बलि भी दी। यह बच्चे 8 दिन तक भूखे रहे।