थंगखाली शरणार्थी शिविर में आठ दिन की अपनी बेटी को बांहों में थामे 20 साल की सितारा का भी यही ख्वाब है। वह कहती है, ‘‘मैं चाहती हूं कि एक दिन मेरी बेटी म्यांमा देखे।’’ वह ख्वाब और हकीकत के बीच का फर्क भी जानती है और कहती है, ‘‘जब तक सभी नहीं जाएंगे, मैं वापस नहीं जाऊंगी।’’