इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नाम चौराहों से लेकर चौपालों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। पीएम मोदी के इजरायल दौरे के बाद से हर जुबान पर बेंजामिन के किस्से हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पीएम बनने से पहले बेंजामिन नेतन्याहू इजरायली सेना के सबसे खतरनाक मिशनों का हिस्सा रहे हैं!
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बेंजामिन नेतन्याहू
नेतन्याहू का जन्म तेल अवीव में 1949 में हुआ था। 1963 में बेंजामिन का परिवार अमेरिका चला गया। 18 साल की उम्र में वो इजरायल लौट आये और 1967 में इजरायल डिफेंस फोर्सेस ज्वाइन की ।
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बेंजामिन
कुछ समय बाद उन्हें स्पेशल फोर्स का लीडर बनाया गया। बेंजामिन ने सैनिक के रूप में 1968 में ऑपरेशन इनफरनो, 1968 में ऑपरेशन गिफ्ट और 1972 में ऑपरेशन इसोटोप को अंजाम दिया।
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बेंजामिन नेतन्याहू
1973 में बेंजामिन मिशन वार ऑफ अट्रीशन और योम किपूर का भी हिस्सा रहे। जिसमें बेंजामिन ने बहादुरी दिखाई और अपने दुश्मनों का जड़ से सफाया किया। उनकी बहादुरी को देखकर सेना में उन्हें कैप्टन रैंक मिली।
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बेंजामिन नेतन्याहू
1978 में बेंजामिन ने अपने भाई योनातन नेतन्याहू की याद में एंटी टेरर इंस्टीट्यूट की स्थापना की। बेंजामिन के भाई और लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतन्याहू भी बहादुर सैनिक थे जिन्होंने 1976 में ऑपरेशन एटेंबे में लड़ते हुए अपनी जान गंवाई थी।
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बेंजामिन नेतन्याहू
1996 में बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने थे। वह यहां के पहले ऐसे PM भी हैं जो कि 1948 में इजरायल के गठन के बाद पैदा हुए। इजरायल में हुए चुनाव में जीतकर वह चौथी बार प्रधानमंत्री बने और सबसे लंबे समय तक इस पद पर बने रहने वाले इजरायली नेता भी बने।
बेंजामिन नेतन्याहू बहादुर सैनिक होने के साथ ही सख्त मिजाज नेता माने जाते हैं। इजरायल में लोग उनके सख्त मिजाज के कारण आलोचना भी करते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें इजरायल की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न करने की छवि से भी जोड़ा जाता है। इसका उदाहरण यह भी है कि 2014 में उन्होंने रॉकेट हमलों को मंजूरी दी और इन हमलों में हजारों फिलिस्तिनी मारे गए।