पाकिस्तान में 25 जुलाई को आम चुनाव के लिए मतदान होने हैं। भारी राजनीतिक उथल- पुथल वाला यह देश अब 71 साल का हो चुका है। लेकिन यह बात चौंकाती है कि आजादी के 71 साल के भीतर भारत ने जहां तरक्की के नए आयाम विकसित किए वहीं पाकिस्तान में भारी राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजरता रहा।
राजनीतिक असंतोष वाले पाकिस्तान ने लोकतंत्र के साथ ही सैन्य शासन को झेला। 71 वर्षों में पाकिस्तान की जनता ने 35 साल सैन्य शासन और तानाशाही को झेला। महज दो बार ही प्रधानमंत्री ने पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा किया। आंकड़े बताते हैं कि इन 71 वर्षों में पाकिस्तान में यहां 13 बार सरकारें बनीं जिसमें 18 लोग 22 बार प्रधानमंत्री बने।
आतंकवाद का पनाहगाह कहा जाने वाला पाकिस्तान इन दिनों वैश्विक निशाने पर है। उसपर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने की भी बात चल रही है। दूसरी तरफ पाकिस्तान में आमचुनाव की तैयारी जोर शोर से चल रही है। यह वहां का 15वां आम चुनाव होगा। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक हलकों में बदलाव के लिए महत्वपूर्ण नहीं होगा बल्कि चुनावी खर्च के मामले में भी इस बार कई रिकॉर्ड टूटेंगे। बताया जा रहा है कि 2013 में हुए चुनाव से इसबार का चुनाव चार गुणा खर्चीला होने जा रहा है। सिर्फ चुनाव आयोग चुनावी प्रक्रिया पर 1700 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है।