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Nepal Unrest: 20 साल पहले ज्ञानेंद्र की राजशाही का अंत.. अब बीते दो दशक की सबसे बड़ी हिंसा, UN तक पहुंची चिंता

Tue, 09 Sep 2025 12:21 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

नेपाल में बीस साल बाद एक बार फिर सड़कों पर खून बहा। सरकार द्वारा सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाजें हिंसा में बदल गईं। देखते ही देखते प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि इसमें 19 लोगों की मौत हो गई, जिसमें एक 12 साल का मासूम भी शामिल था। यह प्रदर्शन 2006 की राजशाही विरोधी क्रांति के बाद नेपाल का सबसे बड़ा विरोध पदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र भी इसको लेकर चिंतित है। 

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नेपाल में विरोध प्रदर्शन - फोटो : पीटीआई

नेपाल सरकार की तरफ से सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का फैसला नेपाल के लिए घातक और डरावना रूप लेता हुआ नजर आ रहा है। फलस्वरूप नेपाल के लिए सोमवार का दिन बीते दो दशकों का सबसे खतरनाक और दुखद साबित हुआ। देश के कई हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक 12 साल का बच्चा भी शामिल है। यह एक दिन में सबसे ज्यादा मौतें 2006 के उस आंदोलन के बाद हुई हैं, जिसमें नेपाल की राजशाही खत्म हुई थी और राजा ज्ञानेंद्र को हटाया गया था।

समझिए क्यों भड़की हिंसा?
बता दें कि इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई। सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगा दी थी। इससे लोग गुस्से में आ गए और बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। हजारों की संख्या में युवा प्रदर्शनकारी सोमवार सुबह काठमांडू के मैतीघर इलाके में इकट्ठा हुए। वे सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे। ऐसे में हालात तब बिगड़ गए जब कुछ लोगों ने संसद भवन में घुसने की कोशिश की और गेट को आग लगा दी।

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नेपाल में विरोध प्रदर्शन - फोटो : पीटीआई
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
बात इतनी बढ़ गई कि इसको लेकर संयुक्त राष्ट्र में भी चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र की नेपाल प्रतिनिधि हाना सिंगर-हम्दी ने इस हिंसा पर गहरी चिंता जताई। साथ ही सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगो को शांतिपूर्वक अपने लोकतांत्रिक अधिकार इस्तेमाल करने की आजादी होनी चाहिए। हालांकि नेपाल सरकार ने मामले में जांच के लिए एक समिति भी बनाई है जो 15 दिनों में रिपोर्ट देगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि हिंसा क्यों हुई और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को की रोकने की कोशिश और फिर...
प्रदर्शकारी जब संसद भवन में घुसने लगे तब पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछारें, आंसू गैस और गोलियां चलाईं। इसी दौरान कई लोग घायल हो गए। इतना ही नहीं बात इतनी बिगड़ गई कि इसी क्रम में काठमांडू में 17 और सुनसरी जिले में दो लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी। 

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नेपाल में विरोध प्रदर्शन - फोटो : पीटीआई
दावा- पुलिस ने छात्रों पर चलाई गोलियां
मामले में लोगो का आक्रोश सातवें आसमान पर तब पहुंच गया जब पुलिस द्वारा छात्रा पर गोलियां चलाने की बात सामने आने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो पुलिस ने बच्चों और स्कूल यूनिफॉर्म पहने छात्रों तक पर गोली चलाई। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने 15 से ज्यादा लोगों को गोली लगते देखा। हालात इतने खराब हो गए कि हॉस्पिटल में जगह और एम्बुलेंस की कमी की वजह से घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल सका।

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नेपाल में विरोध प्रदर्शन - फोटो : ANI
नेपाल सरकार की कोशिश और कदम?
घटना के बाद नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को कैबिनेट मीटिंग में अपना इस्तीफा सौंपा। साथ ही कहा कि वो नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं। हालांकि नेपाल सरकार ने स्थिति को काबू में करने के लिए कर्फ्यू भी लगा दिया है। इसके तहत रूपन्देही जिले के बुटवल और भैरहवा में शाम चार बजे से रात दस बजे तक कर्फ्यू रहेगा। वहीं सुनसरी जिले के इटहरी में भी मुख्य इलाकों में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगाया गया है।

मानवाधिकार आयोग की टिप्पणी
नेपाल के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग को दुखद बताया। आयोग ने सरकार से कहा कि मृतकों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए, घायलों का मुफ्त इलाज किया जाए और घटना की गंभीर जांच होनी चाहिए। साथ ही प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और हिंसा से दूर रहने की अपील भी की गई है।
 
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