नेपाल सरकार की तरफ से सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का फैसला नेपाल के लिए घातक और डरावना रूप लेता हुआ नजर आ रहा है। फलस्वरूप नेपाल के लिए सोमवार का दिन बीते दो दशकों का सबसे खतरनाक और दुखद साबित हुआ। देश के कई हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक 12 साल का बच्चा भी शामिल है। यह एक दिन में सबसे ज्यादा मौतें 2006 के उस आंदोलन के बाद हुई हैं, जिसमें नेपाल की राजशाही खत्म हुई थी और राजा ज्ञानेंद्र को हटाया गया था।
समझिए क्यों भड़की हिंसा?
बता दें कि इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई। सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगा दी थी। इससे लोग गुस्से में आ गए और बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। हजारों की संख्या में युवा प्रदर्शनकारी सोमवार सुबह काठमांडू के मैतीघर इलाके में इकट्ठा हुए। वे सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे। ऐसे में हालात तब बिगड़ गए जब कुछ लोगों ने संसद भवन में घुसने की कोशिश की और गेट को आग लगा दी।